इहराम
हज की शुरुआत। मीकात पर सफेद कपड़े पहने जाते हैं, नियत की जाती है और तलबिया पढ़ी जाती है।
इस्लाम का पाँचवाँ स्तंभ: अर्थ, अनुष्ठान और हिकमत
हज की शुरुआत। मीकात पर सफेद कपड़े पहने जाते हैं, नियत की जाती है और तलबिया पढ़ी जाती है।
काबा के चारों ओर सात बार चक्कर। हर चक्कर में हजरे-असवद को सलाम और दुआ की जाती है।
सफा और मरवा के बीच सात बार आना-जाना, हज़रत हाजिरा की पानी की तलाश की याद में।
हज का सबसे महत्वपूर्ण रुकन। ज़िलहिज्जा की 9 तारीख को अरफात में दोपहर से शाम तक रुका जाता है।
मिना में तीन खंभों पर पत्थर, कुर्बानी, बाल मुंडाना और इहराम खोलना।
हज दुनियावी फर्क मिटाने वाली समानता का मैदान है। अमीर-गरीब एक ही सफेद कपड़े में रब के सामने खड़े होते हैं।
हजारों साल बाद भी इब्राहीम की पुकार पर लब्बैक कहने वाले लाखों लोग साबित करते हैं कि मानवजाति की सबसे बड़ी दावत की गूंज अभी भी है।
अरफात में बिताए एक पल का असर सालों के सैद्धांतिक ज्ञान से परे है। सच्चा चिंतन वहीं से शुरू होता है।
हज केवल एक भौगोलिक यात्रा नहीं है — यह इंसान की अपने आप से, अपनी रचना से और अपने रब की तरफ सबसे गहरी यात्रा है। करोड़ों का एक बिंदु पर मिलना एक गहरी हकीकत की तरफ इशारा करता है।