1.9 अरब अनुयायियों के साथ दुनिया के दूसरे सबसे बड़े धर्म का परिचय
إِسْلَام
"इस्लाम" शब्द अरबी 'सिलम' (शांति) और 'तस्लीम' (समर्पण) से आया है। ये दो अर्थ इस्लाम के सार को दर्शाते हैं: अल्लाह को स्वेच्छा से समर्पण, आंतरिक शांति और दुनिया के साथ शांति। 'मुसलमान' वह है जो अल्लाह को समर्पित है।
इस्लाम का सार तौहीद है: अल्लाह एक है, उसका कोई साझीदार, समकक्ष या पुत्र नहीं। सारी सृष्टि उस पर निर्भर है। यह गहरी सच्चाई अस्तित्व के अर्थ के बारे में सबसे बुनियादी सवाल का जवाब देती है।
अल्लाह ने मानवजाति को मार्गदर्शन देने के लिए नबियों को भेजा और किताबें नाज़िल कीं। मूसा को तौरात, ईसा को इंजील और मुहम्मद को कुरआन दिया गया। कुरआन एकमात्र दिव्य किताब है जो आज भी अपने मूल रूप में सुरक्षित है।
इस्लाम व्यक्ति और समाज दोनों की भलाई के लिए एक व्यापक नैतिक ढांचा प्रदान करता है। ईमानदारी, न्याय, करुणा, एकजुटता और प्रकृति के साथ सामंजस्य इस्लाम के केंद्रीय मूल्य हैं।
कुरआन में सबसे पहले नाज़िल होने वाला शब्द था 'पढ़ो!' इस्लाम में ज्ञान की तलाश एक इबादत है। 8वीं से 13वीं शताब्दी के बीच इस्लामी दुनिया ने गणित, खगोल विज्ञान, चिकित्सा और दर्शन में मानव इतिहास का सबसे बड़ा योगदान दिया।
"मैं यहां क्यों हूं? जीवन का अर्थ क्या है?" — इस्लाम इन गहरे सवालों से न कोई मतवाद थोपकर और न अस्वीकार करके नज़दीक आता है। यह मन और दिल की यात्रा का निमंत्रण है।