Kâria
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
ٱلْقَارِعَةُ﴿١﴾
वह खड़खड़ा देने वाली।
—مَا ٱلْقَارِعَةُ﴿٢﴾
क्या है वह खड़खड़ा देने वाली?
—وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلْقَارِعَةُ﴿٣﴾
और तुम क्या जानो कि वह खड़खड़ा देने वाली क्या है?1
—يَوْمَ يَكُونُ ٱلنَّاسُ كَٱلْفَرَاشِ ٱلْمَبْثُوثِ﴿٤﴾
जिस दिन लोग बिखरे हुए पतिंगों की तरह हो जाएँगे।
—وَتَكُونُ ٱلْجِبَالُ كَٱلْعِهْنِ ٱلْمَنفُوشِ﴿٥﴾
और पर्वत धुने हुए रंगीन ऊन की तरह हो जाएँगे।1
—فَأَمَّا مَن ثَقُلَتْ مَوَٰزِينُهُۥ﴿٦﴾
तो जिसके पलड़े भारी हो गए,
—فَهُوَ فِى عِيشَةٍ رَّاضِيَةٍ﴿٧﴾
तो वह संतोषजनक जीवन में होगा।
—وَأَمَّا مَنْ خَفَّتْ مَوَٰزِينُهُۥ﴿٨﴾
तथा जिसके पलड़े हल्के हो गए,
—فَأُمُّهُۥ هَاوِيَةٌ﴿٩﴾
उसका ठिकाना 'हाविया' (गड्ढा) है।
—وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا هِيَهْ﴿١٠﴾
और तुम क्या जानो कि वह ('हाविया') क्या है?
—نَارٌ حَامِيَةٌۢ﴿١١﴾
वह एक बहुत गर्म आग है।1
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