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المؤمنون

Al-Mu'minun

Mü'minûn

मक्की·118 आयतें

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

23:1
पारा 18
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 342

قَدْ أَفْلَحَ ٱلْمُؤْمِنُونَ﴿١﴾

निश्चय सफल हो गए ईमान वाले।

—
23:2
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 342

ٱلَّذِينَ هُمْ فِى صَلَاتِهِمْ خَـٰشِعُونَ﴿٢﴾

जो अपनी नमाज़ में विनम्रता अपनाने वाले हैं।

—
23:3
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 342

وَٱلَّذِينَ هُمْ عَنِ ٱللَّغْوِ مُعْرِضُونَ﴿٣﴾

और जो व्यर्थ चीज़ों1 से मुँह मोड़ने वाले हैं।

—
23:4
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 342

وَٱلَّذِينَ هُمْ لِلزَّكَوٰةِ فَـٰعِلُونَ﴿٤﴾

तथा जो ज़कात अदा करने वाले हैं।

—
23:5
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 342

وَٱلَّذِينَ هُمْ لِفُرُوجِهِمْ حَـٰفِظُونَ﴿٥﴾

और जो अपने गुप्तांगों की रक्षा करने वाले हैं।

—
23:6
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 342

إِلَّا عَلَىٰٓ أَزْوَٰجِهِمْ أَوْ مَا مَلَكَتْ أَيْمَـٰنُهُمْ فَإِنَّهُمْ غَيْرُ مَلُومِينَ﴿٦﴾

सिवाय अपनी पत्नियों या उन महिलाओं के जो उनके स्वामित्व में हैं, तो निःसंदेह वे निंदित नहीं हैं।

—
23:7
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 342

فَمَنِ ٱبْتَغَىٰ وَرَآءَ ذَٰلِكَ فَأُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْعَادُونَ﴿٧﴾

फिर जो इसके अलावा तलाश करे, तो वही लोग सीमा का उल्लंघन करने वाले हैं।

—
23:8
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 342

وَٱلَّذِينَ هُمْ لِأَمَـٰنَـٰتِهِمْ وَعَهْدِهِمْ رَٰعُونَ﴿٨﴾

और जो अपनी अमानतों तथा अपनी प्रतिज्ञा का ध्यान रखने वाले हैं।

—
23:9
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 342

وَٱلَّذِينَ هُمْ عَلَىٰ صَلَوَٰتِهِمْ يُحَافِظُونَ﴿٩﴾

तथा जो अपनी नमाज़ों की रक्षा करते हैं।

—
23:10
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 342

أُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْوَٰرِثُونَ﴿١٠﴾

यही लोग हैं, जो वारिस (उत्तराधिकारी) हैं।

—
23:11
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 342

ٱلَّذِينَ يَرِثُونَ ٱلْفِرْدَوْسَ هُمْ فِيهَا خَـٰلِدُونَ﴿١١﴾

जो फ़िरदौस1 के वारिस होंगे, वे उसमें हमेशा रहने वाले हैं।

—
23:12
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 342

وَلَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ مِن سُلَـٰلَةٍ مِّن طِينٍ﴿١٢﴾

और निःसंदेह हमने मनुष्य को तुच्छ मिट्टी के एक सार से पैदा किया।

—
23:13
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 342

ثُمَّ جَعَلْنَـٰهُ نُطْفَةً فِى قَرَارٍ مَّكِينٍ﴿١٣﴾

फिर हमने उसे वीर्य बनाकर एक सुरक्षित स्थान1 में रखा।

—
23:14
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 342

ثُمَّ خَلَقْنَا ٱلنُّطْفَةَ عَلَقَةً فَخَلَقْنَا ٱلْعَلَقَةَ مُضْغَةً فَخَلَقْنَا ٱلْمُضْغَةَ عِظَـٰمًا فَكَسَوْنَا ٱلْعِظَـٰمَ لَحْمًا ثُمَّ أَنشَأْنَـٰهُ خَلْقًا ءَاخَرَ ۚ فَتَبَارَكَ ٱللَّهُ أَحْسَنُ ٱلْخَـٰلِقِينَ﴿١٤﴾

फिर हमने उस वीर्य को एक जमा हुआ रक्त बनाया, फिर हमने उस जमे हुए रक्त को एक बोटी बनाया, फिर हमने उस बोटी को हड्डियाँ बनाया, फिर हमने उन हड्डियों को कुछ माँस पहनाया, फिर हमने उसे एक अन्य रूप में पैदा कर दिया। तो बहुत बरकत वाला है अल्लाह, जो बनाने वालों में सबसे अच्छा है।

—
23:15
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 342

ثُمَّ إِنَّكُم بَعْدَ ذَٰلِكَ لَمَيِّتُونَ﴿١٥﴾

फिर निःसंदेह तुम इसके पश्चात् अवश्य मरने वाले हो।

—
23:16
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 342

ثُمَّ إِنَّكُمْ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ تُبْعَثُونَ﴿١٦﴾

फिर निःसंदेह तुम क़ियामत के दिन उठाए जाओगे।

—
23:17
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 342

وَلَقَدْ خَلَقْنَا فَوْقَكُمْ سَبْعَ طَرَآئِقَ وَمَا كُنَّا عَنِ ٱلْخَلْقِ غَـٰفِلِينَ﴿١٧﴾

और निःसंदेह हमने तुम्हारे ऊपर सात आकाश बनाए और हम कभी सृष्टि से ग़ाफ़िल1 नहीं।

—
23:18
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 343

وَأَنزَلْنَا مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءًۢ بِقَدَرٍ فَأَسْكَنَّـٰهُ فِى ٱلْأَرْضِ ۖ وَإِنَّا عَلَىٰ ذَهَابٍۭ بِهِۦ لَقَـٰدِرُونَ﴿١٨﴾

और हमने आकाश से एक अंदाज़े के साथ कुछ पानी उतारा, फिर उसे धरती में ठहराया और निश्चय हम उसे किसी भी तरह से ले जाने पर सामर्थ्यवान हैं।

—
23:19
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 343

فَأَنشَأْنَا لَكُم بِهِۦ جَنَّـٰتٍ مِّن نَّخِيلٍ وَأَعْنَـٰبٍ لَّكُمْ فِيهَا فَوَٰكِهُ كَثِيرَةٌ وَمِنْهَا تَأْكُلُونَ﴿١٩﴾

फिर हमने तुम्हारे लिए उस (पानी) के द्वारा खजूरों तथा अंगूरों के बाग़ पैदा किए। तुम्हारे लिए उनमें बहुत-से फल हैं और तुम उन्ही में से खाते हो।

—
23:20
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 343

وَشَجَرَةً تَخْرُجُ مِن طُورِ سَيْنَآءَ تَنۢبُتُ بِٱلدُّهْنِ وَصِبْغٍ لِّلْـَٔاكِلِينَ﴿٢٠﴾

तथा वह वृक्ष भी जो 'तूर सैना' (पर्वत) से निकलता है, जो तेल लेकर उगता है तथा खाने वालों के लिए एक तरह का सालन भी।

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23:21
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 343

وَإِنَّ لَكُمْ فِى ٱلْأَنْعَـٰمِ لَعِبْرَةً ۖ نُّسْقِيكُم مِّمَّا فِى بُطُونِهَا وَلَكُمْ فِيهَا مَنَـٰفِعُ كَثِيرَةٌ وَمِنْهَا تَأْكُلُونَ﴿٢١﴾

और निःसंदेह तुम्हारे लिए चौपायों में निश्चय बड़ी शिक्षा है। हम तुम्हें उसमें से जो उनके पेटों में1 है, पिलाते हैं। तथा तुम्हारे लिए उनके अंदर बहुत-से लाभ हैं और उनमें से कुछ को तुम खाते हो।

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23:22
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 343

وَعَلَيْهَا وَعَلَى ٱلْفُلْكِ تُحْمَلُونَ﴿٢٢﴾

तथा उनपर और नावों पर तुम सवार किए जाते हो।

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23:23
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 343

وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوْمِهِۦ فَقَالَ يَـٰقَوْمِ ٱعْبُدُوا۟ ٱللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَـٰهٍ غَيْرُهُۥٓ ۖ أَفَلَا تَتَّقُونَ﴿٢٣﴾

तथा निःसंदेह हमने नूह़1 को उसकी जाति की ओर भेजा। तो उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अल्लाह की इबादत करो। उसके सिवा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं। तो क्या तुम डरते नहीं?

—
23:24
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 343

فَقَالَ ٱلْمَلَؤُا۟ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مِن قَوْمِهِۦ مَا هَـٰذَآ إِلَّا بَشَرٌ مِّثْلُكُمْ يُرِيدُ أَن يَتَفَضَّلَ عَلَيْكُمْ وَلَوْ شَآءَ ٱللَّهُ لَأَنزَلَ مَلَـٰٓئِكَةً مَّا سَمِعْنَا بِهَـٰذَا فِىٓ ءَابَآئِنَا ٱلْأَوَّلِينَ﴿٢٤﴾

तो उनकी जाति के उन प्रमुखों ने कहा, जिन्होंने कुफ़्र किया : यह तो तुम्हारे ही जैसा एक मनुष्य है। जो चाहता है कि तुमपर वरीयता प्राप्त कर ले। और यदि अल्लाह चाहता, तो अवश्य कोई फ़रिश्ते उतार देता। हमने यह1 अपने पहले बाप-दादा में नहीं सुना।

—
23:25
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 343

إِنْ هُوَ إِلَّا رَجُلٌۢ بِهِۦ جِنَّةٌ فَتَرَبَّصُوا۟ بِهِۦ حَتَّىٰ حِينٍ﴿٢٥﴾

यह तो बस एक उन्मादग्रस्त व्यक्ति है। अतः एक समय तक इसके बारे में प्रतीक्षा करो।

—
23:26
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 343

قَالَ رَبِّ ٱنصُرْنِى بِمَا كَذَّبُونِ﴿٢٦﴾

उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरी मदद कर, इसलिए कि इन्होंने मुझे झुठलाया है।

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23:27
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 343

فَأَوْحَيْنَآ إِلَيْهِ أَنِ ٱصْنَعِ ٱلْفُلْكَ بِأَعْيُنِنَا وَوَحْيِنَا فَإِذَا جَآءَ أَمْرُنَا وَفَارَ ٱلتَّنُّورُ ۙ فَٱسْلُكْ فِيهَا مِن كُلٍّ زَوْجَيْنِ ٱثْنَيْنِ وَأَهْلَكَ إِلَّا مَن سَبَقَ عَلَيْهِ ٱلْقَوْلُ مِنْهُمْ ۖ وَلَا تُخَـٰطِبْنِى فِى ٱلَّذِينَ ظَلَمُوٓا۟ ۖ إِنَّهُم مُّغْرَقُونَ﴿٢٧﴾

तो हमने उसकी ओर वह़्य (प्रकाशना) की कि हमारी आँखों के सामने और हमारी वह़्य के अनुसार नौका बना। फिर जब हमारा आदेश आ जाए तथा तन्नूर उबल पड़े, तो प्रत्येक जीव का जोड़ा नर और मादा तथा अपने परिवार वालों को उसमें सवार कर ले, उनमें से उसके सिवाय जिसके बारे में पहले निर्णय हो चुका है। और मुझसे उनके बारे में बात न करना, जिन्होंने अत्याचार किया है। निश्चय वे डुबोए जाने वाले हैं।

—
23:28
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 344

فَإِذَا ٱسْتَوَيْتَ أَنتَ وَمَن مَّعَكَ عَلَى ٱلْفُلْكِ فَقُلِ ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ ٱلَّذِى نَجَّىٰنَا مِنَ ٱلْقَوْمِ ٱلظَّـٰلِمِينَ﴿٢٨﴾

फिर जब तू और जो तेरे साथ हैं, नाव पर बैठ जाओ, तो कह : सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने हमें अत्याचारी लोगों से छुटकारा दिया।

—
23:29
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 344

وَقُل رَّبِّ أَنزِلْنِى مُنزَلًا مُّبَارَكًا وَأَنتَ خَيْرُ ٱلْمُنزِلِينَ﴿٢٩﴾

तथा तू कह : ऐ मेरे पालनहार! मुझे बरकत वाली जगह उतार और तू सब उतारने वालों से उत्तम है।

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23:30
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 344

إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَـٰتٍ وَإِن كُنَّا لَمُبْتَلِينَ﴿٣٠﴾

निःसंदेह इसमें निश्चय कई निशानियाँ हैं तथा निःसंदेह हम निश्चय परीक्षा लेने वाले1 हैं।

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23:31
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 344

ثُمَّ أَنشَأْنَا مِنۢ بَعْدِهِمْ قَرْنًا ءَاخَرِينَ﴿٣١﴾

फिर हमने उनके पश्चात् दूसरे समुदाय को पैदा किया।

—
23:32
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 344

فَأَرْسَلْنَا فِيهِمْ رَسُولًا مِّنْهُمْ أَنِ ٱعْبُدُوا۟ ٱللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَـٰهٍ غَيْرُهُۥٓ ۖ أَفَلَا تَتَّقُونَ﴿٣٢﴾

फिर हमने उनके अंदर उन्हीं में से एक रसूल भेजा कि अल्लाह की इबादत करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं। तो क्या तुम डरते नहीं?

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23:33
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 344

وَقَالَ ٱلْمَلَأُ مِن قَوْمِهِ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ وَكَذَّبُوا۟ بِلِقَآءِ ٱلْـَٔاخِرَةِ وَأَتْرَفْنَـٰهُمْ فِى ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا مَا هَـٰذَآ إِلَّا بَشَرٌ مِّثْلُكُمْ يَأْكُلُ مِمَّا تَأْكُلُونَ مِنْهُ وَيَشْرَبُ مِمَّا تَشْرَبُونَ﴿٣٣﴾

और उसकी जाति के उन प्रमुखों ने, जिन्होंने कुफ़्र किया और आख़िरत की भेंट को झुठलाया, तथा हमने उन्हें सांसारिक जीवन में सुख-समृद्धि प्रदान कर रखी थी, कहा : यह तो बस तुम्हारे ही जैसा एक इनसान है। जो उसमें से खाता है, जिसमें से तुम खाते हो और उसमें से पीता है, जो तुम पीते हो।

—
23:34
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 344

وَلَئِنْ أَطَعْتُم بَشَرًا مِّثْلَكُمْ إِنَّكُمْ إِذًا لَّخَـٰسِرُونَ﴿٣٤﴾

और निःसंदेह यदि तुमने अपने ही जैसे एक मनुष्य का कहना मान लिया, तो निश्चय तुम उस समय अवश्य घाटा उठाने वाले होगे।

—
23:35
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 344

أَيَعِدُكُمْ أَنَّكُمْ إِذَا مِتُّمْ وَكُنتُمْ تُرَابًا وَعِظَـٰمًا أَنَّكُم مُّخْرَجُونَ﴿٣٥﴾

क्या यह तुमसे वादा करता है कि जब तुम मर गए और धूल तथा हड्डियाँ बन गए, तो तुम निकाले जाने वाले हो?

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23:36
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 344

۞ هَيْهَاتَ هَيْهَاتَ لِمَا تُوعَدُونَ﴿٣٦﴾

दूरी है, दूरी है उसके लिए जिसका तुमसे वादा किया जाता है।

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23:37
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 344

إِنْ هِىَ إِلَّا حَيَاتُنَا ٱلدُّنْيَا نَمُوتُ وَنَحْيَا وَمَا نَحْنُ بِمَبْعُوثِينَ﴿٣٧﴾

यह (जीवन) तो बस हमारा सांसारिक जीवन है। हम (यहीं) मरते और जीते हैं। और हम कभी उठाए जाने वाले नहीं।

—
23:38
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 344

إِنْ هُوَ إِلَّا رَجُلٌ ٱفْتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ كَذِبًا وَمَا نَحْنُ لَهُۥ بِمُؤْمِنِينَ﴿٣٨﴾

यह तो बस एक व्यक्ति है, जिसने अल्लाह पर एक झूठ गढ़ लिया है और हम कदापि उसे मानने वाले नहीं हैं।

—
23:39
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 344

قَالَ رَبِّ ٱنصُرْنِى بِمَا كَذَّبُونِ﴿٣٩﴾

उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरी मदद कर, इसलिए कि इन्होंने मुझे झुठलाया है।

—
23:40
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 344

قَالَ عَمَّا قَلِيلٍ لَّيُصْبِحُنَّ نَـٰدِمِينَ﴿٤٠﴾

(अल्लाह ने) कहा : बहुत ही कम समय में ये अवश्य पछताएँगे।

—
23:41
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 344

فَأَخَذَتْهُمُ ٱلصَّيْحَةُ بِٱلْحَقِّ فَجَعَلْنَـٰهُمْ غُثَآءً ۚ فَبُعْدًا لِّلْقَوْمِ ٱلظَّـٰلِمِينَ﴿٤١﴾

अन्ततः उन्हें चीख़ ने सत्य के साथ आ पकड़ा। तो हमने उन्हें कूड़ा-कर्कट बना दिया। तो दूरी हो अत्याचारियों के लिए।

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23:42
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 344

ثُمَّ أَنشَأْنَا مِنۢ بَعْدِهِمْ قُرُونًا ءَاخَرِينَ﴿٤٢﴾

फिर हमने उनके पश्चात् कई और युग के लोगों को पैदा किया।

—
23:43
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 345

مَا تَسْبِقُ مِنْ أُمَّةٍ أَجَلَهَا وَمَا يَسْتَـْٔخِرُونَ﴿٤٣﴾

कोई समुदाय अपने निश्चित समय से न आगे बढ़ता है और न वे पीछे रहते हैं।1

—
23:44
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 345

ثُمَّ أَرْسَلْنَا رُسُلَنَا تَتْرَا ۖ كُلَّ مَا جَآءَ أُمَّةً رَّسُولُهَا كَذَّبُوهُ ۚ فَأَتْبَعْنَا بَعْضَهُم بَعْضًا وَجَعَلْنَـٰهُمْ أَحَادِيثَ ۚ فَبُعْدًا لِّقَوْمٍ لَّا يُؤْمِنُونَ﴿٤٤﴾

फिर हमने अपने रसूल निरंतर भेजे। जब कभी किसी समुदाय के पास उसका रसूल आया, तो उसके लोगों ने उसे झुठला दिया। तो हमने उनमें से कुछ को कुछ के पीछे चलता किया1 और उन्हें कहानियाँ बना दिया। तो दूरी हो उन लोगों के लिए, जो ईमान नहीं लाते।

—
23:45
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 345

ثُمَّ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ وَأَخَاهُ هَـٰرُونَ بِـَٔايَـٰتِنَا وَسُلْطَـٰنٍ مُّبِينٍ﴿٤٥﴾

फिर हमने मूसा तथा उसके भाई हारून को अपनी निशानियों तथा स्पष्ट तर्क के साथ भेजा।

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23:46
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 345

إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَإِي۟هِۦ فَٱسْتَكْبَرُوا۟ وَكَانُوا۟ قَوْمًا عَالِينَ﴿٤٦﴾

फ़िरऔन और उसके सरदारों की ओर। तो उन्होंने घमंड किया और वे सरकश लोग थे।

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23:47
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 345

فَقَالُوٓا۟ أَنُؤْمِنُ لِبَشَرَيْنِ مِثْلِنَا وَقَوْمُهُمَا لَنَا عَـٰبِدُونَ﴿٤٧﴾

उन्होंने कहा : क्या हम अपने जैसे दो व्यक्तियों पर ईमान ले आएँ , जबकि उनके लोग हमारे दास हैं?

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23:48
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 345

فَكَذَّبُوهُمَا فَكَانُوا۟ مِنَ ٱلْمُهْلَكِينَ﴿٤٨﴾

तो उन्होंने दोनों को झुठला दिया, तो वे विनष्ट किए गए लोगों में से हो गए।

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23:49
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 345

وَلَقَدْ ءَاتَيْنَا مُوسَى ٱلْكِتَـٰبَ لَعَلَّهُمْ يَهْتَدُونَ﴿٤٩﴾

और निःसंदेह हमने मूसा को पुस्तक1 प्रदान की, ताकि वे (लोग) मार्गदर्शन पा जाएँ।

—
23:50
पारा 18 · हिज़्ब 35 · पृष्ठ 345

وَجَعَلْنَا ٱبْنَ مَرْيَمَ وَأُمَّهُۥٓ ءَايَةً وَءَاوَيْنَـٰهُمَآ إِلَىٰ رَبْوَةٍ ذَاتِ قَرَارٍ وَمَعِينٍ﴿٥٠﴾

और हमने मरयम के पुत्र (ईसा) तथा उसकी माँ को महान निशानी बनाया तथा दोनों को एक ऊँची भूमि1 पर ठिकाना दिया, जो रहने के योग्य तथा प्रवाहित पानी वाली थी।

—
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