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मुसहफ़ व्यू
0/83

يس

Ya-Sin

Yâsîn

मक्की·83 आयतें

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

36:1
पारा 22
पारा 22 · हिज़्ब 44 · पृष्ठ 440

يسٓ﴿١﴾

या, सीन।

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36:2
पारा 22 · हिज़्ब 44 · पृष्ठ 440

وَٱلْقُرْءَانِ ٱلْحَكِيمِ﴿٢﴾

क़सम है हिकमत वाले क़ुरआन की!

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36:3
पारा 22 · हिज़्ब 44 · पृष्ठ 440

إِنَّكَ لَمِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ﴿٣﴾

निःसंदेह आप रसूलों में से हैं।

—
36:4
पारा 22 · हिज़्ब 44 · पृष्ठ 440

عَلَىٰ صِرَٰطٍ مُّسْتَقِيمٍ﴿٤﴾

सीधे रास्ते पर हैं।

—
36:5
पारा 22 · हिज़्ब 44 · पृष्ठ 440

تَنزِيلَ ٱلْعَزِيزِ ٱلرَّحِيمِ﴿٥﴾

(यह) प्रभुत्वशाली, अति दयावान् (अल्लाह) का उतारा हुआ है।

—
36:6
पारा 22 · हिज़्ब 44 · पृष्ठ 440

لِتُنذِرَ قَوْمًا مَّآ أُنذِرَ ءَابَآؤُهُمْ فَهُمْ غَـٰفِلُونَ﴿٦﴾

ताकि आप उस जाति1 को डराएँ, जिनके बााप-दादा नहीं डराए गए थे। इसलिए वे ग़ाफ़िल हैं।

—
36:7
पारा 22 · हिज़्ब 44 · पृष्ठ 440

لَقَدْ حَقَّ ٱلْقَوْلُ عَلَىٰٓ أَكْثَرِهِمْ فَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ﴿٧﴾

उनमें से अधिकतर लोगों पर बात1 सिद्ध हो चुकी है। अतः वे ईमान नहीं लाएँगे।

—
36:8
पारा 22 · हिज़्ब 44 · पृष्ठ 440

إِنَّا جَعَلْنَا فِىٓ أَعْنَـٰقِهِمْ أَغْلَـٰلًا فَهِىَ إِلَى ٱلْأَذْقَانِ فَهُم مُّقْمَحُونَ﴿٨﴾

तथा हमने उनकी गर्दनों में तौक़ डाल दिए हैं, जो ठुड्डियों से लगे हैं।1 इसलिए वे सिर ऊपर किए हुए हैं।

—
36:9
पारा 22 · हिज़्ब 44 · पृष्ठ 440

وَجَعَلْنَا مِنۢ بَيْنِ أَيْدِيهِمْ سَدًّا وَمِنْ خَلْفِهِمْ سَدًّا فَأَغْشَيْنَـٰهُمْ فَهُمْ لَا يُبْصِرُونَ﴿٩﴾

तथा हमने उनके आगे एक आड़ बना दी है और उनके पीछे एक आड़। फिर हमने उनको ढाँक दिया है। अतः वे1 देख ही नहीं पाते।

—
36:10
पारा 22 · हिज़्ब 44 · पृष्ठ 440

وَسَوَآءٌ عَلَيْهِمْ ءَأَنذَرْتَهُمْ أَمْ لَمْ تُنذِرْهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ﴿١٠﴾

और उनके लिए बराबर है, चाहे आप उन्हें डराएँ या न डराएँ, वे ईमान नहीं लाएँगे।

—
36:11
पारा 22 · हिज़्ब 44 · पृष्ठ 440

إِنَّمَا تُنذِرُ مَنِ ٱتَّبَعَ ٱلذِّكْرَ وَخَشِىَ ٱلرَّحْمَـٰنَ بِٱلْغَيْبِ ۖ فَبَشِّرْهُ بِمَغْفِرَةٍ وَأَجْرٍ كَرِيمٍ﴿١١﴾

आप तो केवल उस व्यक्ति को डरा सकते हैं, जो इस ज़िक्र (क़ुरआन) का पालन करे, तथा बिन देखे रहमान (अत्यंत दयावान् अल्लाह) से डरे। तो आप उसे क्षमा तथा सम्मानजनक बदले की शुभ सूचना दे दें।

—
36:12
पारा 22 · हिज़्ब 44 · पृष्ठ 440

إِنَّا نَحْنُ نُحْىِ ٱلْمَوْتَىٰ وَنَكْتُبُ مَا قَدَّمُوا۟ وَءَاثَـٰرَهُمْ ۚ وَكُلَّ شَىْءٍ أَحْصَيْنَـٰهُ فِىٓ إِمَامٍ مُّبِينٍ﴿١٢﴾

निःसंदेह हम ही मुर्दों को जीवित करेंगे। तथा हम उनके कर्मों और उनके पद्चिह्नों1 को लिख रहे हैं। तथा प्रत्येक वस्तु को हमने स्पष्ट पुस्तक में दर्ज कर रखा है।

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36:13
पारा 22 · हिज़्ब 44 · पृष्ठ 441

وَٱضْرِبْ لَهُم مَّثَلًا أَصْحَـٰبَ ٱلْقَرْيَةِ إِذْ جَآءَهَا ٱلْمُرْسَلُونَ﴿١٣﴾

तथा आप उन्हें1 बस्ती वालों का एक उदाहरण दीजिए। जब वहाँ (अल्लाह के) भेजे हुए रसूल आए।

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36:14
पारा 22 · हिज़्ब 44 · पृष्ठ 441

إِذْ أَرْسَلْنَآ إِلَيْهِمُ ٱثْنَيْنِ فَكَذَّبُوهُمَا فَعَزَّزْنَا بِثَالِثٍ فَقَالُوٓا۟ إِنَّآ إِلَيْكُم مُّرْسَلُونَ﴿١٤﴾

जब हमने उनकी ओर दो (रसूलों को) भेजा। तो उन्होंने उन दोनों को झुठला दिया। तब हमने तीसरे के द्वारा शक्ति पहुँचाई। तो तीनों ने कहा : निःसंदेह हम तुम्हारी ओर भेजे गए हैं।

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36:15
पारा 22 · हिज़्ब 44 · पृष्ठ 441

قَالُوا۟ مَآ أَنتُمْ إِلَّا بَشَرٌ مِّثْلُنَا وَمَآ أَنزَلَ ٱلرَّحْمَـٰنُ مِن شَىْءٍ إِنْ أَنتُمْ إِلَّا تَكْذِبُونَ﴿١٥﴾

उन्होंने कहा : तुम सब तो हमारे ही जैसे मनुष्य1 हो, और अत्यंत दयावान् (अल्लाह) ने कुछ भी नहीं उतारा है। तुम तो बस झूठ बोल रहे हो।

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36:16
पारा 22 · हिज़्ब 44 · पृष्ठ 441

قَالُوا۟ رَبُّنَا يَعْلَمُ إِنَّآ إِلَيْكُمْ لَمُرْسَلُونَ﴿١٦﴾

उन रसूलों ने कहा : हमारा पालनहार जानता है कि हम निश्चय ही तुम्हारी ओर रसूल बनाकर भेजे गए हैं।

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36:17
पारा 22 · हिज़्ब 44 · पृष्ठ 441

وَمَا عَلَيْنَآ إِلَّا ٱلْبَلَـٰغُ ٱلْمُبِينُ﴿١٧﴾

तथा हमारा दायित्व खुले तौर पर संदेश पहुँचा देने के सिवा और कुछ नहीं है।

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36:18
पारा 22 · हिज़्ब 44 · पृष्ठ 441

قَالُوٓا۟ إِنَّا تَطَيَّرْنَا بِكُمْ ۖ لَئِن لَّمْ تَنتَهُوا۟ لَنَرْجُمَنَّكُمْ وَلَيَمَسَّنَّكُم مِّنَّا عَذَابٌ أَلِيمٌ﴿١٨﴾

उन लोगों ने कहा : हम तुम्हें अशुभ (मनहूस) समझते हैं। यदि तुम बाज़ नहीं आए, तो हम तुम्हें निश्चित रूप से पथराव करके मार डालेंगे और तुम्हें अवश्य ही हमारी ओर से दुःखदायी यातना पहुँचेगी।

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36:19
पारा 22 · हिज़्ब 44 · पृष्ठ 441

قَالُوا۟ طَـٰٓئِرُكُم مَّعَكُمْ ۚ أَئِن ذُكِّرْتُم ۚ بَلْ أَنتُمْ قَوْمٌ مُّسْرِفُونَ﴿١٩﴾

उन लोगों ने कहा : तुम्हारा अपशकुन तुम्हारे ही साथ है। क्या इसलिए कि तुम्हें उपदेश दिया गया? बल्कि तुम उल्लंघनकारी लोग हो।

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36:20
पारा 22 · हिज़्ब 44 · पृष्ठ 441

وَجَآءَ مِنْ أَقْصَا ٱلْمَدِينَةِ رَجُلٌ يَسْعَىٰ قَالَ يَـٰقَوْمِ ٱتَّبِعُوا۟ ٱلْمُرْسَلِينَ﴿٢٠﴾

तथा नगर के अंतिम किनारे से एक व्यक्ति दौड़ता हुआ आया। उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! रसूलों का कहा मानो।

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36:21
पारा 22 · हिज़्ब 44 · पृष्ठ 441

ٱتَّبِعُوا۟ مَن لَّا يَسْـَٔلُكُمْ أَجْرًا وَهُم مُّهْتَدُونَ﴿٢١﴾

तुम उनका अनुसरण करो, जो तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला) नहीं माँगते तथा वे सीधे मार्ग पर हैं।

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36:22
पारा 22 · हिज़्ब 44 · पृष्ठ 441

وَمَا لِىَ لَآ أَعْبُدُ ٱلَّذِى فَطَرَنِى وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ﴿٢٢﴾

तथा मुझे क्या हुआ है कि मैं उसकी इबादत न करूँ, जिसने मुझे पैदा किया है और तुम (सब) उसी की ओर लौटाए जाओगे?1

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36:23
पारा 22 · हिज़्ब 44 · पृष्ठ 441

ءَأَتَّخِذُ مِن دُونِهِۦٓ ءَالِهَةً إِن يُرِدْنِ ٱلرَّحْمَـٰنُ بِضُرٍّ لَّا تُغْنِ عَنِّى شَفَـٰعَتُهُمْ شَيْـًٔا وَلَا يُنقِذُونِ﴿٢٣﴾

क्या मैं उसे छोड़कर दूसरे पूज्य बना लूँ? यदि रहमान (अत्यंत दयावान् अल्लाह) मुझे कोई हानि पहुँचाना चाहे, तो उनकी सिफ़ारिश मुझे कुछ लाभ नहीं पहुँचा सकेगी और न वे मुझे बचा सकेंगे।

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36:24
पारा 22 · हिज़्ब 44 · पृष्ठ 441

إِنِّىٓ إِذًا لَّفِى ضَلَـٰلٍ مُّبِينٍ﴿٢٤﴾

निःसंदेह मैं उस समय खुली गुमराही में हूँगा।

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36:25
पारा 22 · हिज़्ब 44 · पृष्ठ 441

إِنِّىٓ ءَامَنتُ بِرَبِّكُمْ فَٱسْمَعُونِ﴿٢٥﴾

निःसंदेह मैं तुम्हारे पालनहार पर ईमान ले आया। अतः मेरी बात सुनो।

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36:26
पारा 22 · हिज़्ब 44 · पृष्ठ 441

قِيلَ ٱدْخُلِ ٱلْجَنَّةَ ۖ قَالَ يَـٰلَيْتَ قَوْمِى يَعْلَمُونَ﴿٢٦﴾

(उससे) कहा गया : जन्नत में प्रवेश कर जा। उसने कहा : काश मेरी जाति भी जान लेती!

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36:27
पारा 22 · हिज़्ब 44 · पृष्ठ 441

بِمَا غَفَرَ لِى رَبِّى وَجَعَلَنِى مِنَ ٱلْمُكْرَمِينَ﴿٢٧﴾

कि मेरे पालनहार ने मुझे क्षमा1 कर दिया और मुझे सम्मानित लोगों में शामिल कर दिया।

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36:28
पारा 23 · हिज़्ब 45 · पृष्ठ 442

۞ وَمَآ أَنزَلْنَا عَلَىٰ قَوْمِهِۦ مِنۢ بَعْدِهِۦ مِن جُندٍ مِّنَ ٱلسَّمَآءِ وَمَا كُنَّا مُنزِلِينَ﴿٢٨﴾

तथा हमने उसके पश्चात् उसकी जाति पर आकाश से कोई सेना नहीं उतारी और न हम उतारने वाले थे।1

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36:29
पारा 23 · हिज़्ब 45 · पृष्ठ 442

إِن كَانَتْ إِلَّا صَيْحَةً وَٰحِدَةً فَإِذَا هُمْ خَـٰمِدُونَ﴿٢٩﴾

वह तो मात्र एक तेज़ आवाज़ (चिंघाड़) थी। फिर एकाएक वे बुझे हुए थे।1

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36:30
पारा 23 · हिज़्ब 45 · पृष्ठ 442

يَـٰحَسْرَةً عَلَى ٱلْعِبَادِ ۚ مَا يَأْتِيهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا كَانُوا۟ بِهِۦ يَسْتَهْزِءُونَ﴿٣٠﴾

हाय अफसोस है1 बंदों पर! उनके पास जो भी रसूल आता, वे उसका उपहास किया करते थे।

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36:31
पारा 23 · हिज़्ब 45 · पृष्ठ 442

أَلَمْ يَرَوْا۟ كَمْ أَهْلَكْنَا قَبْلَهُم مِّنَ ٱلْقُرُونِ أَنَّهُمْ إِلَيْهِمْ لَا يَرْجِعُونَ﴿٣١﴾

क्या उन्होंने नहीं देखा कि हमने उनसे पहले कितने ही समुदायों को विनष्ट कर दिया कि वे उनकी ओर लौटकर नहीं आएँगे।

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36:32
पारा 23 · हिज़्ब 45 · पृष्ठ 442

وَإِن كُلٌّ لَّمَّا جَمِيعٌ لَّدَيْنَا مُحْضَرُونَ﴿٣٢﴾

तथा वे जितने भी हैं सबके सब हमारे सामने उपस्थित किए जाएँगे।1

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36:33
पारा 23 · हिज़्ब 45 · पृष्ठ 442

وَءَايَةٌ لَّهُمُ ٱلْأَرْضُ ٱلْمَيْتَةُ أَحْيَيْنَـٰهَا وَأَخْرَجْنَا مِنْهَا حَبًّا فَمِنْهُ يَأْكُلُونَ﴿٣٣﴾

तथा उनके1 लिए एक बड़ी निशानी मृत भूमि है। हमने उसे जीवित किया और उससे अन्न निकाला। तो वे उसी में से खाते हैं।

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36:34
पारा 23 · हिज़्ब 45 · पृष्ठ 442

وَجَعَلْنَا فِيهَا جَنَّـٰتٍ مِّن نَّخِيلٍ وَأَعْنَـٰبٍ وَفَجَّرْنَا فِيهَا مِنَ ٱلْعُيُونِ﴿٣٤﴾

तथा हमने उसमें खजूरों और अंगूरों के कई बाग बनाए और उनमें कई जल स्रोत प्रवाहित कर दिए।

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36:35
पारा 23 · हिज़्ब 45 · पृष्ठ 442

لِيَأْكُلُوا۟ مِن ثَمَرِهِۦ وَمَا عَمِلَتْهُ أَيْدِيهِمْ ۖ أَفَلَا يَشْكُرُونَ﴿٣٥﴾

ताकि वे उसके फल खाएँ, हालाँकि उसे उनके हाथों ने नहीं बनाया है। तो क्या वे आभार प्रकट नहीं करते?

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36:36
पारा 23 · हिज़्ब 45 · पृष्ठ 442

سُبْحَـٰنَ ٱلَّذِى خَلَقَ ٱلْأَزْوَٰجَ كُلَّهَا مِمَّا تُنۢبِتُ ٱلْأَرْضُ وَمِنْ أَنفُسِهِمْ وَمِمَّا لَا يَعْلَمُونَ﴿٣٦﴾

पवित्र है वह अस्तित्व जिसने सभी जोड़े पैदा किए, उन चीज़ों के भी जिन्हें धरती उगाती है, और स्वयं उन (मनुष्यों) के अपने भी, और उनके भी जिन्हें वे नहीं जानते।

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36:37
पारा 23 · हिज़्ब 45 · पृष्ठ 442

وَءَايَةٌ لَّهُمُ ٱلَّيْلُ نَسْلَخُ مِنْهُ ٱلنَّهَارَ فَإِذَا هُم مُّظْلِمُونَ﴿٣٧﴾

तथा एक निशानी उनके लिए रात है। जिससे हम दिन को खींच लेते हैं, तो एकाएक वे अंधेरे में हो जाते हैं।

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36:38
पारा 23 · हिज़्ब 45 · पृष्ठ 442

وَٱلشَّمْسُ تَجْرِى لِمُسْتَقَرٍّ لَّهَا ۚ ذَٰلِكَ تَقْدِيرُ ٱلْعَزِيزِ ٱلْعَلِيمِ﴿٣٨﴾

तथा सूर्य अपने नियत ठिकाने की ओर चला जा रहा है। यह प्रभुत्वशाली, सब कुछ जानने वाले (अल्लाह) का निर्धारित किया हुआ है।

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36:39
पारा 23 · हिज़्ब 45 · पृष्ठ 442

وَٱلْقَمَرَ قَدَّرْنَـٰهُ مَنَازِلَ حَتَّىٰ عَادَ كَٱلْعُرْجُونِ ٱلْقَدِيمِ﴿٣٩﴾

तथा चाँद की हमने मंज़िलें निर्धारित कर दी हैं। यहाँ तक कि वह फिर खजूर की पुरानी सूखी टेढ़ी टहनी के समान हो जाता है।

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36:40
पारा 23 · हिज़्ब 45 · पृष्ठ 442

لَا ٱلشَّمْسُ يَنۢبَغِى لَهَآ أَن تُدْرِكَ ٱلْقَمَرَ وَلَا ٱلَّيْلُ سَابِقُ ٱلنَّهَارِ ۚ وَكُلٌّ فِى فَلَكٍ يَسْبَحُونَ﴿٤٠﴾

न तो सूर्य ही से हो सकता है कि चाँद को जा पकड़े और न रात ही दिन से पहले आने वाली है। और सब एक-एक कक्षा में तैर रहे हैं।

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36:41
पारा 23 · हिज़्ब 45 · पृष्ठ 443

وَءَايَةٌ لَّهُمْ أَنَّا حَمَلْنَا ذُرِّيَّتَهُمْ فِى ٱلْفُلْكِ ٱلْمَشْحُونِ﴿٤١﴾

तथा उनके लिए एक निशानी (यह भी) है कि हमने उनकी नस्ल को भरी हुई नाव में सवार किया।

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36:42
पारा 23 · हिज़्ब 45 · पृष्ठ 443

وَخَلَقْنَا لَهُم مِّن مِّثْلِهِۦ مَا يَرْكَبُونَ﴿٤٢﴾

तथा हमने उनके लिए उस (नाव) जैसी कई और चीज़ें बनाईं, जिनपर वे सवार होते हैं।

—
36:43
पारा 23 · हिज़्ब 45 · पृष्ठ 443

وَإِن نَّشَأْ نُغْرِقْهُمْ فَلَا صَرِيخَ لَهُمْ وَلَا هُمْ يُنقَذُونَ﴿٤٣﴾

और यदि हम चाहें, तो उन्हें डुबो दें। फिर न कोई उनकी फ़र्याद को पहुँचने वाला हो और न वे बचाए जाएँ।

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36:44
पारा 23 · हिज़्ब 45 · पृष्ठ 443

إِلَّا رَحْمَةً مِّنَّا وَمَتَـٰعًا إِلَىٰ حِينٍ﴿٤٤﴾

परंतु हमारी ओर से दया और एक समय तक लाभ पहुँचाने की वजह से।

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36:45
पारा 23 · हिज़्ब 45 · पृष्ठ 443

وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ ٱتَّقُوا۟ مَا بَيْنَ أَيْدِيكُمْ وَمَا خَلْفَكُمْ لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ﴿٤٥﴾

और1 जब उनसे कहा जाता है कि उस (यातना) से डरो, जो तुम्हारे आगे है और जो तुम्हारे पीछे है, ताकि तुमपर दया की जाए।

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36:46
पारा 23 · हिज़्ब 45 · पृष्ठ 443

وَمَا تَأْتِيهِم مِّنْ ءَايَةٍ مِّنْ ءَايَـٰتِ رَبِّهِمْ إِلَّا كَانُوا۟ عَنْهَا مُعْرِضِينَ﴿٤٦﴾

और उनके पास उनके पालनहार की निशानियों में से कोई निशानी नहीं आती परंतु वे उससे मुँह फेरने वाले होते हैं।

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36:47
पारा 23 · हिज़्ब 45 · पृष्ठ 443

وَإِذَا قِيلَ لَهُمْ أَنفِقُوا۟ مِمَّا رَزَقَكُمُ ٱللَّهُ قَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لِلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ أَنُطْعِمُ مَن لَّوْ يَشَآءُ ٱللَّهُ أَطْعَمَهُۥٓ إِنْ أَنتُمْ إِلَّا فِى ضَلَـٰلٍ مُّبِينٍ﴿٤٧﴾

तथा जब उनसे कहा जाता है कि उस धन में से खर्च करो, जो अल्लाह ने तुम्हें प्रदान किया है, तो काफ़िर लोग ईमान वालों से कहते हैं : क्या हम उसे खाना खिलाएँ, जिसे यदि अल्लाह चाहता, तो खिला देता? तुम तो खुली गुमराही में हो।

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36:48
पारा 23 · हिज़्ब 45 · पृष्ठ 443

وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَـٰذَا ٱلْوَعْدُ إِن كُنتُمْ صَـٰدِقِينَ﴿٤٨﴾

तथा वे कहते हैं : यह (क़ियामत का) वादा कब पूरा होगा, यदि तुम सच्चे हो?

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36:49
पारा 23 · हिज़्ब 45 · पृष्ठ 443

مَا يَنظُرُونَ إِلَّا صَيْحَةً وَٰحِدَةً تَأْخُذُهُمْ وَهُمْ يَخِصِّمُونَ﴿٤٩﴾

वे केवल एक चिंघाड़1 की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो उन्हें आ पकड़ेगी, जबकि वे (आपस में) झगड़ रहे होंगे।

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36:50
पारा 23 · हिज़्ब 45 · पृष्ठ 443

فَلَا يَسْتَطِيعُونَ تَوْصِيَةً وَلَآ إِلَىٰٓ أَهْلِهِمْ يَرْجِعُونَ﴿٥٠﴾

फिर वे न कोई वसीयत कर सकेंगे और न अपने परिजनों की ओर वापस आ सकेंगे।

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