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Ya-Sin - आयत 30

36:30
पारा 23 · हिज़्ब 45 · पृष्ठ 442

يَـٰحَسْرَةً عَلَى ٱلْعِبَادِ ۚ مَا يَأْتِيهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا كَانُوا۟ بِهِۦ يَسْتَهْزِءُونَ﴿٣٠﴾

हाय अफसोस है1 बंदों पर! उनके पास जो भी रसूल आता, वे उसका उपहास किया करते थे।

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Ya-Sin - 36:30

يَـٰحَسْرَةً عَلَى ٱلْعِبَادِ ۚ مَا يَأْتِيهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا كَانُوا۟ بِهِۦ يَسْتَهْزِءُونَ

हाय अफसोस है1 बंदों पर! उनके पास जो भी रसूल आता, वे उसका उपहास किया करते थे।

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