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Meâric

मक्की·44 आयतें

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

70:1
पारा 29
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 568

سَأَلَ سَآئِلٌۢ بِعَذَابٍ وَاقِعٍ﴿١﴾

एक माँगने वाले1 ने वह यातना माँगी, जो घटित होने वाली है।

—
70:2
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 568

لِّلْكَـٰفِرِينَ لَيْسَ لَهُۥ دَافِعٌ﴿٢﴾

काफ़िरों पर। उसे कोई टालने वाला नहीं।

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70:3
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 568

مِّنَ ٱللَّهِ ذِى ٱلْمَعَارِجِ﴿٣﴾

ऊँचाइयों वाले अल्लाह की ओर से।

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70:4
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 568

تَعْرُجُ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ وَٱلرُّوحُ إِلَيْهِ فِى يَوْمٍ كَانَ مِقْدَارُهُۥ خَمْسِينَ أَلْفَ سَنَةٍ﴿٤﴾

फ़रिश्ते और रूह1 उसकी ओर चढ़ेंगे, एक ऐसे दिन में जिसकी मात्रा पचास हज़ार वर्ष है।

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70:5
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 568

فَٱصْبِرْ صَبْرًا جَمِيلًا﴿٥﴾

अतः (ऐ नबी!) आप अच्छे धैर्य से काम लें।

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70:6
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 568

إِنَّهُمْ يَرَوْنَهُۥ بَعِيدًا﴿٦﴾

निःसंदेह वे उसे दूर समझ रहे हैं।

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70:7
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 568

وَنَرَىٰهُ قَرِيبًا﴿٧﴾

और हम उसे निकट देख रहे हैं।

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70:8
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 568

يَوْمَ تَكُونُ ٱلسَّمَآءُ كَٱلْمُهْلِ﴿٨﴾

जिस दिन आकाश पिघली हुई धातु के समान हो जाएगा।

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70:9
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 568

وَتَكُونُ ٱلْجِبَالُ كَٱلْعِهْنِ﴿٩﴾

और पर्वत धुने हुए ऊन के समान हो जाएँगे।1

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70:10
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 568

وَلَا يَسْـَٔلُ حَمِيمٌ حَمِيمًا﴿١٠﴾

और कोई मित्र किसी मित्र को नहीं पूछेगा।

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70:11
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

يُبَصَّرُونَهُمْ ۚ يَوَدُّ ٱلْمُجْرِمُ لَوْ يَفْتَدِى مِنْ عَذَابِ يَوْمِئِذٍۭ بِبَنِيهِ﴿١١﴾

हालाँकि वे उन्हें दिखाए जा रहे होंगे। अपराधी चाहेगा कि काश उस दिन की यातना से बचने के लिए छुड़ौती में दे दे अपने बेटों को।

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70:12
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

وَصَـٰحِبَتِهِۦ وَأَخِيهِ﴿١٢﴾

तथा अपनी पत्नी और अपने भाई को।

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70:13
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

وَفَصِيلَتِهِ ٱلَّتِى تُـْٔوِيهِ﴿١٣﴾

तथा अपने परिवार (कुटुंब) को, जो उसे शरण देता था।

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70:14
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

وَمَن فِى ٱلْأَرْضِ جَمِيعًا ثُمَّ يُنجِيهِ﴿١٤﴾

और उन सभी लोगों1 को जो धरती में हैं। फिर अपने आपको बचा ले।

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70:15
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

كَلَّآ ۖ إِنَّهَا لَظَىٰ﴿١٥﴾

कदापि नहीं! निःसंदेह वह (जहन्नम) भड़कने वाली आग है।

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70:16
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

نَزَّاعَةً لِّلشَّوَىٰ﴿١٦﴾

जो खाल उधेड़ देने वाली है।

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70:17
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

تَدْعُوا۟ مَنْ أَدْبَرَ وَتَوَلَّىٰ﴿١٧﴾

वह उसे पुकारेगी, जिसने पीठ फेरी1 और मुँह मोड़ा।

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70:18
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

وَجَمَعَ فَأَوْعَىٰٓ﴿١٨﴾

तथा (धन) एकत्र किया और संभाल कर रखा।

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70:19
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

۞ إِنَّ ٱلْإِنسَـٰنَ خُلِقَ هَلُوعًا﴿١٩﴾

निःसंदेह मनुष्य बहुत अधीर बनाया गया है।

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70:20
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

إِذَا مَسَّهُ ٱلشَّرُّ جَزُوعًا﴿٢٠﴾

जब उसे कष्ट पहुँचता है, तो बहुत घबरा जाने वाला है।

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70:21
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

وَإِذَا مَسَّهُ ٱلْخَيْرُ مَنُوعًا﴿٢١﴾

और जब उसे भलाई मिलती है, तो बहुत रोकने वाला है।

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70:22
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

إِلَّا ٱلْمُصَلِّينَ﴿٢٢﴾

सिवाय नमाज़ियों के।

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70:23
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

ٱلَّذِينَ هُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ دَآئِمُونَ﴿٢٣﴾

जो हमेशा अपनी नमाज़ों की पाबंदी करते हैं।

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70:24
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

وَٱلَّذِينَ فِىٓ أَمْوَٰلِهِمْ حَقٌّ مَّعْلُومٌ﴿٢٤﴾

और जिनके धन में एक निश्चित भाग है।

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70:25
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

لِّلسَّآئِلِ وَٱلْمَحْرُومِ﴿٢٥﴾

माँगने वाले तथा वंचित1 के लिए।

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70:26
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

وَٱلَّذِينَ يُصَدِّقُونَ بِيَوْمِ ٱلدِّينِ﴿٢٦﴾

और जो बदले के दिन को सत्य मानते हैं।

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70:27
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

وَٱلَّذِينَ هُم مِّنْ عَذَابِ رَبِّهِم مُّشْفِقُونَ﴿٢٧﴾

और जो अपने पालनहार की यातना से डरने वाले हैं।

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70:28
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

إِنَّ عَذَابَ رَبِّهِمْ غَيْرُ مَأْمُونٍ﴿٢٨﴾

निश्चय उनके पालनहार की यातना ऐसी चीज़ है, जिससे निश्चिंत नहीं हुआ जा सकता।

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70:29
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

وَٱلَّذِينَ هُمْ لِفُرُوجِهِمْ حَـٰفِظُونَ﴿٢٩﴾

और जो अपने गुप्तांगों की रक्षा करते हैं।

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70:30
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

إِلَّا عَلَىٰٓ أَزْوَٰجِهِمْ أَوْ مَا مَلَكَتْ أَيْمَـٰنُهُمْ فَإِنَّهُمْ غَيْرُ مَلُومِينَ﴿٣٠﴾

सिवाय अपनी पत्नियों से या अपने स्वामित्व में आई दासियों1 से, तो निश्चय वे निंदनीय नहीं हैं।

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70:31
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

فَمَنِ ٱبْتَغَىٰ وَرَآءَ ذَٰلِكَ فَأُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْعَادُونَ﴿٣١﴾

फिर जो इसके अलावा कुछ और चाहे, तो ऐसे ही लोग सीमा का उल्लंघन करने वाले हैं।

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70:32
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

وَٱلَّذِينَ هُمْ لِأَمَـٰنَـٰتِهِمْ وَعَهْدِهِمْ رَٰعُونَ﴿٣٢﴾

और जो अपनी अमानतों तथा अपनी प्रतिज्ञा का ध्यान रखने वाले हैं।

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70:33
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

وَٱلَّذِينَ هُم بِشَهَـٰدَٰتِهِمْ قَآئِمُونَ﴿٣٣﴾

और जो अपनी गवाहियों पर क़ायम रहने वाले हैं।

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70:34
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

وَٱلَّذِينَ هُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ يُحَافِظُونَ﴿٣٤﴾

तथा जो अपनी नमाज़ की रक्षा करते हैं।

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70:35
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

أُو۟لَـٰٓئِكَ فِى جَنَّـٰتٍ مُّكْرَمُونَ﴿٣٥﴾

वही लोग जन्नतों में सम्मानित होंगे।

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70:36
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

فَمَالِ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ قِبَلَكَ مُهْطِعِينَ﴿٣٦﴾

फिर इन काफ़िरों को क्या हुआ है कि वे आपकी ओर दौड़े चले आ रहे है?

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70:37
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

عَنِ ٱلْيَمِينِ وَعَنِ ٱلشِّمَالِ عِزِينَ﴿٣٧﴾

दाएँ से और बाएँ से समूह के समूह।1

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70:38
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

أَيَطْمَعُ كُلُّ ٱمْرِئٍ مِّنْهُمْ أَن يُدْخَلَ جَنَّةَ نَعِيمٍ﴿٣٨﴾

क्या उनमें से प्रत्येक व्यक्ति यह लालच रखता है कि उसे नेमत वाली जन्नत में दाखिल किया जाएगा?

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70:39
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

كَلَّآ ۖ إِنَّا خَلَقْنَـٰهُم مِّمَّا يَعْلَمُونَ﴿٣٩﴾

कदापि नहीं, निश्चय हमने उन्हें उस चीज़1 से पैदा किया है, जिसे वे जानते हैं।

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70:40
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 569

فَلَآ أُقْسِمُ بِرَبِّ ٱلْمَشَـٰرِقِ وَٱلْمَغَـٰرِبِ إِنَّا لَقَـٰدِرُونَ﴿٤٠﴾

तो मैं क़सम खाता हूँ पूर्वों (सूर्योदय के स्थानों) तथा पश्चिमों (सूर्यास्त के स्थानों) के रब की! निश्चय हम सक्षम हैं।

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70:41
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 570

عَلَىٰٓ أَن نُّبَدِّلَ خَيْرًا مِّنْهُمْ وَمَا نَحْنُ بِمَسْبُوقِينَ﴿٤١﴾

कि उनके स्थान पर उनसे उत्तम लोग ले आएँ तथा हम विवश नहीं हैं।

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70:42
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 570

فَذَرْهُمْ يَخُوضُوا۟ وَيَلْعَبُوا۟ حَتَّىٰ يُلَـٰقُوا۟ يَوْمَهُمُ ٱلَّذِى يُوعَدُونَ﴿٤٢﴾

अतः आप उन्हें छोड़ दें कि वे व्यर्थ की बातों में लगे रहें तथा खेलते रहें, यहाँ तक कि उनका सामना उनके उस दिन से हो जाए, जिसका उनसे वादा किया जाता है।

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70:43
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 570

يَوْمَ يَخْرُجُونَ مِنَ ٱلْأَجْدَاثِ سِرَاعًا كَأَنَّهُمْ إِلَىٰ نُصُبٍ يُوفِضُونَ﴿٤٣﴾

जिस दिन वे क़ब्रों से तेज़ी से बाहर निकलेंगे, जैसे कि वे किसी निशान की ओर1 दौड़े जा रहे हैं।

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70:44
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 570

خَـٰشِعَةً أَبْصَـٰرُهُمْ تَرْهَقُهُمْ ذِلَّةٌ ۚ ذَٰلِكَ ٱلْيَوْمُ ٱلَّذِى كَانُوا۟ يُوعَدُونَ﴿٤٤﴾

उनकी निगाहें झुकी होंगी, उनपर अपमान छाया होगा। यही वह दिन है जिसका उनसे वादा किया1 जाता था।

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