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نوح

Nuh

Nûh

मक्की·28 आयतें

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

71:1
पारा 29
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 570

إِنَّآ أَرْسَلْنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوْمِهِۦٓ أَنْ أَنذِرْ قَوْمَكَ مِن قَبْلِ أَن يَأْتِيَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ﴿١﴾

निःसंदेह हमने नूह़ को उनकी जाति की ओर भेजा कि अपनी जाति को सावधान कर दो, इससे पहले कि उनके पास दर्दनाक यातना आ जाए।

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71:2
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 570

قَالَ يَـٰقَوْمِ إِنِّى لَكُمْ نَذِيرٌ مُّبِينٌ﴿٢﴾

उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! निःसंदेह मैं तुम्हें स्पष्ट रूप से डराने वाला हूँ।

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71:3
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 570

أَنِ ٱعْبُدُوا۟ ٱللَّهَ وَٱتَّقُوهُ وَأَطِيعُونِ﴿٣﴾

कि अल्लाह की इबादत करो तथा उससे डरो और मेरी बात मानो।

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71:4
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 570

يَغْفِرْ لَكُم مِّن ذُنُوبِكُمْ وَيُؤَخِّرْكُمْ إِلَىٰٓ أَجَلٍ مُّسَمًّى ۚ إِنَّ أَجَلَ ٱللَّهِ إِذَا جَآءَ لَا يُؤَخَّرُ ۖ لَوْ كُنتُمْ تَعْلَمُونَ﴿٤﴾

वह तुम्हारे लिए तुम्हारे पापों को क्षमा कर देगा तथा तुम्हें एक निर्धारित समय1 तक मोहलत देगा। निश्चय जब अल्लाह का निर्धारित समय आ जाता है, तो वह टाला नहीं जाता, काश कि तुम जानते होते।

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71:5
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 570

قَالَ رَبِّ إِنِّى دَعَوْتُ قَوْمِى لَيْلًا وَنَهَارًا﴿٥﴾

उसने कहा : ऐ मेरे रब! निःसंदेह मैंने अपनी जाति को रात-दिन बुलाया।

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71:6
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 570

فَلَمْ يَزِدْهُمْ دُعَآءِىٓ إِلَّا فِرَارًا﴿٦﴾

तो मेरे बुलाने से ये लोग और ज़्यादा भागने लगे।

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71:7
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 570

وَإِنِّى كُلَّمَا دَعَوْتُهُمْ لِتَغْفِرَ لَهُمْ جَعَلُوٓا۟ أَصَـٰبِعَهُمْ فِىٓ ءَاذَانِهِمْ وَٱسْتَغْشَوْا۟ ثِيَابَهُمْ وَأَصَرُّوا۟ وَٱسْتَكْبَرُوا۟ ٱسْتِكْبَارًا﴿٧﴾

और निःसंदेह मैंने जब भी उन्हें बुलाया, ताकि तू उन्हें क्षमा कर दे, तो उन्होंने अपनी उँगलियाँ अपने कानों में डाल लीं तथा अपने कपड़े ओढ़ लिए1 और हठ दिखाया और बड़ा घमंड किया।

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71:8
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 570

ثُمَّ إِنِّى دَعَوْتُهُمْ جِهَارًا﴿٨﴾

फिर निःसंदेह मैंने उन्हें खुल्ल-मखुल्ला बुलाया।

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71:9
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 570

ثُمَّ إِنِّىٓ أَعْلَنتُ لَهُمْ وَأَسْرَرْتُ لَهُمْ إِسْرَارًا﴿٩﴾

फिर निःसंदेह मैंने उन्हें उच्च स्वर में आमंत्रित किया और मैंने उन्हें चुपके-चुपके (भी) समझाया।

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71:10
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 570

فَقُلْتُ ٱسْتَغْفِرُوا۟ رَبَّكُمْ إِنَّهُۥ كَانَ غَفَّارًا﴿١٠﴾

तो मैंने कहा : अपने पालनहार से क्षमा माँगो। निःसंदेह वह बहुत क्षमा करने वाला है।

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71:11
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 571

يُرْسِلِ ٱلسَّمَآءَ عَلَيْكُم مِّدْرَارًا﴿١١﴾

वह तुम पर मूसलाधार बारिश बरसाएगा।

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71:12
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 571

وَيُمْدِدْكُم بِأَمْوَٰلٍ وَبَنِينَ وَيَجْعَل لَّكُمْ جَنَّـٰتٍ وَيَجْعَل لَّكُمْ أَنْهَـٰرًا﴿١٢﴾

और वह तुम्हें धन और बच्चों में वृद्धि प्रदान करेगा तथा तुम्हारे लिए बाग़ बना देगा और तुम्हारे लिए नहरें निकाल देगा।

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71:13
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 571

مَّا لَكُمْ لَا تَرْجُونَ لِلَّهِ وَقَارًا﴿١٣﴾

तुम्हें क्या हो गया है कि तुम अल्लाह की महिमा से नहीं डरते?

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71:14
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 571

وَقَدْ خَلَقَكُمْ أَطْوَارًا﴿١٤﴾

हालाँकि उसने तुम्हें विभिन्न चरणों1 में पैदा किया है।

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71:15
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 571

أَلَمْ تَرَوْا۟ كَيْفَ خَلَقَ ٱللَّهُ سَبْعَ سَمَـٰوَٰتٍ طِبَاقًا﴿١٥﴾

क्या तुमने देखा नहीं कि अल्लाह ने किस तरह ऊपर-तले सात आकाश बनाए?

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71:16
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 571

وَجَعَلَ ٱلْقَمَرَ فِيهِنَّ نُورًا وَجَعَلَ ٱلشَّمْسَ سِرَاجًا﴿١٦﴾

और उसने उनमें चाँद को प्रकाश बनाया और सूर्य को दीपक बनाया।

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71:17
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 571

وَٱللَّهُ أَنۢبَتَكُم مِّنَ ٱلْأَرْضِ نَبَاتًا﴿١٧﴾

और अल्लाह ही ने तुम्हें धरती1 से (विशेष ढंग से) उगाया।

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71:18
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 571

ثُمَّ يُعِيدُكُمْ فِيهَا وَيُخْرِجُكُمْ إِخْرَاجًا﴿١٨﴾

फिर वह तुम्हें उसी में वापस ले जाएगा और तुम्हें (उसी से) निकालेगा।

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71:19
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 571

وَٱللَّهُ جَعَلَ لَكُمُ ٱلْأَرْضَ بِسَاطًا﴿١٩﴾

और अल्लाह ने तुम्हारे लिए धरती को बिछौना बनाया।

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71:20
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 571

لِّتَسْلُكُوا۟ مِنْهَا سُبُلًا فِجَاجًا﴿٢٠﴾

ताकि तुम उसके विस्तृत मार्गों पर चलो।

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71:21
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 571

قَالَ نُوحٌ رَّبِّ إِنَّهُمْ عَصَوْنِى وَٱتَّبَعُوا۟ مَن لَّمْ يَزِدْهُ مَالُهُۥ وَوَلَدُهُۥٓ إِلَّا خَسَارًا﴿٢١﴾

नूह ने कहा : ऐ मेरे रब! निःसंदेह उन्होंने मेरी अवज्ञा की और उसका1 अनुसरण किया, जिसके धन और संतान ने उसकी क्षति ही को बढ़ाया।

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71:22
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 571

وَمَكَرُوا۟ مَكْرًا كُبَّارًا﴿٢٢﴾

और उन्होंने बहुत बड़ी चाल चली।

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71:23
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 571

وَقَالُوا۟ لَا تَذَرُنَّ ءَالِهَتَكُمْ وَلَا تَذَرُنَّ وَدًّا وَلَا سُوَاعًا وَلَا يَغُوثَ وَيَعُوقَ وَنَسْرًا﴿٢٣﴾

और उन्होंने कहा : तुम अपने पूज्यों को कदापि न छोड़ना, और न कभी वद्द को छोड़ना, और न सुवाअ को और न यग़ूस और यऊक़ तथा नस्र1 को।

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71:24
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 571

وَقَدْ أَضَلُّوا۟ كَثِيرًا ۖ وَلَا تَزِدِ ٱلظَّـٰلِمِينَ إِلَّا ضَلَـٰلًا﴿٢٤﴾

और निश्चय उन्होंने बहुत-से लोगों को पथभ्रष्ट कर दिया। तथा तू अत्याचारियों की पथभ्रष्टता1 ही में वृद्धि कर।

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71:25
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 571

مِّمَّا خَطِيٓـَٔـٰتِهِمْ أُغْرِقُوا۟ فَأُدْخِلُوا۟ نَارًا فَلَمْ يَجِدُوا۟ لَهُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ أَنصَارًا﴿٢٥﴾

वे अपने पापों के कारण डुबो1 दिए गए, फिर जहन्नम में डाल दिए गए, तो उन्होंने अल्लाह के सिवा अपने लिए कोई मदद करने वाले नहीं पाए।

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71:26
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 571

وَقَالَ نُوحٌ رَّبِّ لَا تَذَرْ عَلَى ٱلْأَرْضِ مِنَ ٱلْكَـٰفِرِينَ دَيَّارًا﴿٢٦﴾

तथा नूह़ ने कहा : ऐ मेरे रब! धरती पर (इन) काफ़िरों में से कोई रहने वाला न छोड़।

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71:27
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 571

إِنَّكَ إِن تَذَرْهُمْ يُضِلُّوا۟ عِبَادَكَ وَلَا يَلِدُوٓا۟ إِلَّا فَاجِرًا كَفَّارًا﴿٢٧﴾

निःसंदेह यदि तू उन्हें छोड़े रखेगा, तो वे तेरे बंदों को पथभ्रष्ट करेंगे और दुराचारी एवं सख़्त काफ़िर ही को जन्म देंगे।

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71:28
पारा 29 · हिज़्ब 57 · पृष्ठ 571

رَّبِّ ٱغْفِرْ لِى وَلِوَٰلِدَىَّ وَلِمَن دَخَلَ بَيْتِىَ مُؤْمِنًا وَلِلْمُؤْمِنِينَ وَٱلْمُؤْمِنَـٰتِ وَلَا تَزِدِ ٱلظَّـٰلِمِينَ إِلَّا تَبَارًۢا﴿٢٨﴾

ऐ मेरे पालनहार! मुझे क्षमा करे दे, तथा मेरे माता-पिता को, और (हर) उस व्यक्ति को जो मेरे घर में मोमिन बन कर प्रवेश करे, तथा ईमान वाले पुरुषों और ईमान वाली स्त्रियों को। और अत्याचारियों को विनाश के सिवाय किसी चीज़ में न बढ़ा।

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