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الإنسان

Al-Insan

İnsân

मदनी·31 आयतें

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

76:1
पारा 29
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 578

هَلْ أَتَىٰ عَلَى ٱلْإِنسَـٰنِ حِينٌ مِّنَ ٱلدَّهْرِ لَمْ يَكُن شَيْـًٔا مَّذْكُورًا﴿١﴾

निश्चय इनसान पर ज़माने का एक ऐसा समय भी गुज़रा है, जब वह कोई ऐसी चीज़ नहीं था जिसका (कहीं) उल्लेख1 हुआ हो।

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76:2
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 578

إِنَّا خَلَقْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ مِن نُّطْفَةٍ أَمْشَاجٍ نَّبْتَلِيهِ فَجَعَلْنَـٰهُ سَمِيعًۢا بَصِيرًا﴿٢﴾

निःसंदेह हमने इनसान को मिश्रित वीर्य1 से पैदा किया, हम उसकी परीक्षा लेते हैं। तो हमने उसे सुनने वाला, देखने वाला बना दिया।

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76:3
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 578

إِنَّا هَدَيْنَـٰهُ ٱلسَّبِيلَ إِمَّا شَاكِرًا وَإِمَّا كَفُورًا﴿٣﴾

निःसंदेह हमने उसे रास्ता दिखा दिया।1 (अब) वह चाहे कृतज्ञ बने और चाहे कृतघ्न।

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76:4
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 578

إِنَّآ أَعْتَدْنَا لِلْكَـٰفِرِينَ سَلَـٰسِلَا۟ وَأَغْلَـٰلًا وَسَعِيرًا﴿٤﴾

निःसंदेह हमने काफ़िरों के लिए ज़ंजीरें तथा तौक़ और भड़कती हुई आग तैयार की है।

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76:5
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 578

إِنَّ ٱلْأَبْرَارَ يَشْرَبُونَ مِن كَأْسٍ كَانَ مِزَاجُهَا كَافُورًا﴿٥﴾

निश्चय सदाचारी लोग ऐसे जाम से पिएँगे, जिसमें कपूर का मिश्रण होगा।

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76:6
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 579

عَيْنًا يَشْرَبُ بِهَا عِبَادُ ٱللَّهِ يُفَجِّرُونَهَا تَفْجِيرًا﴿٦﴾

यह एक स्रोत होगा, जिससे अल्लाह के बंदे पीएँगे। वे उसे (जहाँ चाहेंगे) बहा ले जाएँगे।1

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76:7
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 579

يُوفُونَ بِٱلنَّذْرِ وَيَخَافُونَ يَوْمًا كَانَ شَرُّهُۥ مُسْتَطِيرًا﴿٧﴾

जो नज़्र (मन्नत)1 पूरी करते हैं और उस दिन2 से डरते हैं जिसकी आपदा चारों ओर फैली हुई होगी।

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76:8
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 579

وَيُطْعِمُونَ ٱلطَّعَامَ عَلَىٰ حُبِّهِۦ مِسْكِينًا وَيَتِيمًا وَأَسِيرًا﴿٨﴾

और वे निर्धन, अनाथ और क़ैदी को खाना (खुद) उसकी चाहत रखते हुए भी खिलाते हैं।

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76:9
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 579

إِنَّمَا نُطْعِمُكُمْ لِوَجْهِ ٱللَّهِ لَا نُرِيدُ مِنكُمْ جَزَآءً وَلَا شُكُورًا﴿٩﴾

(और कहते हैं :) हम तो तुम्हें केवल अल्लाह के चेहरे की ख़ातिर खिलाते हैं। न तुमसे कोई बदला चाहते हैं और न कृतज्ञता।

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76:10
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 579

إِنَّا نَخَافُ مِن رَّبِّنَا يَوْمًا عَبُوسًا قَمْطَرِيرًا﴿١٠﴾

हम अपने पालनहार से उस दिन से डरते हैं, जो बहुत कठिन और भयानक होगा।

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76:11
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 579

فَوَقَىٰهُمُ ٱللَّهُ شَرَّ ذَٰلِكَ ٱلْيَوْمِ وَلَقَّىٰهُمْ نَضْرَةً وَسُرُورًا﴿١١﴾

तो अल्लाह ने उन्हें उस दिन की आपदा से बचा लिया और उन्हें ताज़गी तथा खुशी प्रदान की।

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76:12
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 579

وَجَزَىٰهُم بِمَا صَبَرُوا۟ جَنَّةً وَحَرِيرًا﴿١٢﴾

और उन्हें उनके धैर्य करने के बदले में जन्नत और रेशमी वस्त्र प्रदान किया।

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76:13
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 579

مُّتَّكِـِٔينَ فِيهَا عَلَى ٱلْأَرَآئِكِ ۖ لَا يَرَوْنَ فِيهَا شَمْسًا وَلَا زَمْهَرِيرًا﴿١٣﴾

वे उसमें तख़्तों पर तकिया लगाए बैठे होंगे। न उसमें धूप देखेंगे और न सख़्त ठंड।

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76:14
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 579

وَدَانِيَةً عَلَيْهِمْ ظِلَـٰلُهَا وَذُلِّلَتْ قُطُوفُهَا تَذْلِيلًا﴿١٤﴾

और उसके साए उनपर झुके हुए होंगे और उसके फलों के गुच्छे उनके वश में कर दिए जाएँगे।

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76:15
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 579

وَيُطَافُ عَلَيْهِم بِـَٔانِيَةٍ مِّن فِضَّةٍ وَأَكْوَابٍ كَانَتْ قَوَارِيرَا۠﴿١٥﴾

तथा उनपर चाँदी के बरतन और प्याले फिराए जाएँगे, जो शीशे के होंगे।

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76:16
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 579

قَوَارِيرَا۟ مِن فِضَّةٍ قَدَّرُوهَا تَقْدِيرًا﴿١٦﴾

शीशे चाँदी के होंगे, उन्होंने उनका ठीक अनुमान लगाया होगा।1

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76:17
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 579

وَيُسْقَوْنَ فِيهَا كَأْسًا كَانَ مِزَاجُهَا زَنجَبِيلًا﴿١٧﴾

और उसमें वे ऐसे जाम पिलाए जाएँगे, जिसमें सोंठ मिली होगी।

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76:18
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 579

عَيْنًا فِيهَا تُسَمَّىٰ سَلْسَبِيلًا﴿١٨﴾

वह उस (जन्नत) में एक स्रोत है, जिसका नाम सलसबील है।

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76:19
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 579

۞ وَيَطُوفُ عَلَيْهِمْ وِلْدَٰنٌ مُّخَلَّدُونَ إِذَا رَأَيْتَهُمْ حَسِبْتَهُمْ لُؤْلُؤًا مَّنثُورًا﴿١٩﴾

और उनके आस-पास ऐसे बालक फिर रहे होंगे, जो सदा बालक ही रहेंगे। जब तुम उन्हें देखोगे, तो उन्हें बिखरे हुए मोती समझोगे।

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76:20
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 579

وَإِذَا رَأَيْتَ ثَمَّ رَأَيْتَ نَعِيمًا وَمُلْكًا كَبِيرًا﴿٢٠﴾

तथा जब तुम वहाँ देखोगे, तो महान नेमत तथा विशाल राज्य देखोगे।

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76:21
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 579

عَـٰلِيَهُمْ ثِيَابُ سُندُسٍ خُضْرٌ وَإِسْتَبْرَقٌ ۖ وَحُلُّوٓا۟ أَسَاوِرَ مِن فِضَّةٍ وَسَقَىٰهُمْ رَبُّهُمْ شَرَابًا طَهُورًا﴿٢١﴾

उनके शरीर पर महीन रेशम के हरे कपड़े तथा दबीज़ रेशमी वस्त्र होंगे और उन्हें चाँदी के कंगन पहनाए जाएँगे और उनका पालनहार उन्हें पवित्र पेय पिलाएगा।

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76:22
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 579

إِنَّ هَـٰذَا كَانَ لَكُمْ جَزَآءً وَكَانَ سَعْيُكُم مَّشْكُورًا﴿٢٢﴾

(तथा कहा जाएगा :) निःसंदेह यह तुम्हारा प्रतिफल है और तुम्हारे प्रयास का सम्मान किया गया।

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76:23
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 579

إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا عَلَيْكَ ٱلْقُرْءَانَ تَنزِيلًا﴿٢٣﴾

निश्चय हम ही ने आपपर यह क़ुरआन थोड़ा-थोड़ा करके1 उतारा है।

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76:24
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 579

فَٱصْبِرْ لِحُكْمِ رَبِّكَ وَلَا تُطِعْ مِنْهُمْ ءَاثِمًا أَوْ كَفُورًا﴿٢٤﴾

अतः आप अपने पालनहार के आदेश के लिए धैर्य रखें और उनमें से किसी पापी या कृतघ्न की बात न मानें।

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76:25
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 579

وَٱذْكُرِ ٱسْمَ رَبِّكَ بُكْرَةً وَأَصِيلًا﴿٢٥﴾

तथा प्रातःकाल और संध्या समय अपने पालनहार का नाम याद करते रहें।

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76:26
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 580

وَمِنَ ٱلَّيْلِ فَٱسْجُدْ لَهُۥ وَسَبِّحْهُ لَيْلًا طَوِيلًا﴿٢٦﴾

तथा रात के कुछ हिस्से में भी उसके लिए सजदा करें और लंबी रात तक उसकी पवित्रता का वर्णन करें।

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76:27
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 580

إِنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ يُحِبُّونَ ٱلْعَاجِلَةَ وَيَذَرُونَ وَرَآءَهُمْ يَوْمًا ثَقِيلًا﴿٢٧﴾

निःसंदेह ये लोग शीघ्र प्राप्त होने वाली चीज़ (संसार) से प्रेम रखते है और एक भारी दिन1 को अपने पीछे छोड़ रहे हैं।

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76:28
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 580

نَّحْنُ خَلَقْنَـٰهُمْ وَشَدَدْنَآ أَسْرَهُمْ ۖ وَإِذَا شِئْنَا بَدَّلْنَآ أَمْثَـٰلَهُمْ تَبْدِيلًا﴿٢٨﴾

हम ही ने उन्हें पैदा किया और उनके जोड़-बंद मज़बूत किए, तथा हम जब चाहेंगे बदलकर उन जैसे1 अन्य लोग ले आएँगे।

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76:29
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 580

إِنَّ هَـٰذِهِۦ تَذْكِرَةٌ ۖ فَمَن شَآءَ ٱتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِۦ سَبِيلًا﴿٢٩﴾

निश्चय यह एक उपदेश है। अतः जो चाहे अपने पालनहार की ओर (जाने वाला) मार्ग पकड़ ले।

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76:30
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 580

وَمَا تَشَآءُونَ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ عَلِيمًا حَكِيمًا﴿٣٠﴾

और तुम अल्लाह के चाहे बिना कुछ भी नहीं चाह सकते।1 निश्चय अल्लाह सब चीज़ों को जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।

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76:31
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 580

يُدْخِلُ مَن يَشَآءُ فِى رَحْمَتِهِۦ ۚ وَٱلظَّـٰلِمِينَ أَعَدَّ لَهُمْ عَذَابًا أَلِيمًۢا﴿٣١﴾

वह जिसे चाहता है अपनी दया में दाखिल करता है और अत्याचारियों के लिए उसने दर्दनाक यातना तैयार की है।

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