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मक्की·46 आयतें

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

79:1
पारा 30
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 583

وَٱلنَّـٰزِعَـٰتِ غَرْقًا﴿١﴾

क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो डूबकर सख़्ती से (प्राण) खींचने वाले हैं!

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79:2
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 583

وَٱلنَّـٰشِطَـٰتِ نَشْطًا﴿٢﴾

और क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो आसानी से (प्राण) निकालने वाले हैं!

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79:3
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 583

وَٱلسَّـٰبِحَـٰتِ سَبْحًا﴿٣﴾

और क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो तेज़ी से तैरने वाले हैं!

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79:4
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 583

فَٱلسَّـٰبِقَـٰتِ سَبْقًا﴿٤﴾

फिर क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो दौड़कर आगे बढ़ने वाले हैं!

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79:5
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 583

فَٱلْمُدَبِّرَٰتِ أَمْرًا﴿٥﴾

फिर क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो आदेश को क्रियान्वित करने वाले हैं!1

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79:6
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 583

يَوْمَ تَرْجُفُ ٱلرَّاجِفَةُ﴿٦﴾

जिस दिन काँपने वाली (अर्थात् धरती) काँप उठेगी।

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79:7
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 583

تَتْبَعُهَا ٱلرَّادِفَةُ﴿٧﴾

उसके पीछे आएगी पीछे आने वाली।

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79:8
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 583

قُلُوبٌ يَوْمَئِذٍ وَاجِفَةٌ﴿٨﴾

उस दिन कई दिल धड़कने वाले होंगे।

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79:9
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 583

أَبْصَـٰرُهَا خَـٰشِعَةٌ﴿٩﴾

उनकी आँखें झुकी हुई होंगी।

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79:10
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 583

يَقُولُونَ أَءِنَّا لَمَرْدُودُونَ فِى ٱلْحَافِرَةِ﴿١٠﴾

वे कहते हैं : क्या हम निश्चय पहली स्थिति में लौटाए जाने वाले हैं?

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79:11
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 583

أَءِذَا كُنَّا عِظَـٰمًا نَّخِرَةً﴿١١﴾

क्या जब हम सड़ी-गली हड्डियाँ हो जाएँगे?

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79:12
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 583

قَالُوا۟ تِلْكَ إِذًا كَرَّةٌ خَاسِرَةٌ﴿١٢﴾

उन्होंने कहा : यह तो उस समय घाटे वाला लौटना होगा।

—
79:13
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 583

فَإِنَّمَا هِىَ زَجْرَةٌ وَٰحِدَةٌ﴿١٣﴾

वह तो केवल एक डाँट होगी।

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79:14
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 583

فَإِذَا هُم بِٱلسَّاهِرَةِ﴿١٤﴾

फिर एकाएक वे (जीवित होकर) धरती के ऊपर होंगे।

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79:15
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 583

هَلْ أَتَىٰكَ حَدِيثُ مُوسَىٰٓ﴿١٥﴾

(ऐ नबी!) क्या आपके पास मूसा की बात पहुँची है?1

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79:16
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 583

إِذْ نَادَىٰهُ رَبُّهُۥ بِٱلْوَادِ ٱلْمُقَدَّسِ طُوًى﴿١٦﴾

जब उसके पालनहार ने उसे पवित्र घाटी 'तुवा' में पुकारा।

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79:17
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

ٱذْهَبْ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ إِنَّهُۥ طَغَىٰ﴿١٧﴾

फ़िरऔन के पास जाओ, निश्चय वह हद से बढ़ गया है।

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79:18
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

فَقُلْ هَل لَّكَ إِلَىٰٓ أَن تَزَكَّىٰ﴿١٨﴾

फिर उससे कहो : क्या तुझे इस बात की इच्छा है कि तू पवित्र हो जाए?

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79:19
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

وَأَهْدِيَكَ إِلَىٰ رَبِّكَ فَتَخْشَىٰ﴿١٩﴾

और मैं तेरे पालनहार की ओर तेरा मार्गदर्शन करूँ, तो तू डर जाए?

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79:20
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

فَأَرَىٰهُ ٱلْـَٔايَةَ ٱلْكُبْرَىٰ﴿٢٠﴾

फिर उसे सबसे बड़ी निशानी (चमत्कार) दिखाई।

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79:21
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

فَكَذَّبَ وَعَصَىٰ﴿٢١﴾

तो उसने झुठला दिया और अवज्ञा की।

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79:22
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

ثُمَّ أَدْبَرَ يَسْعَىٰ﴿٢٢﴾

फिर वह पलटा (मूसा अलैहिस्सलाम के विरोध का) प्रयास करते हुए।

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79:23
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

فَحَشَرَ فَنَادَىٰ﴿٢٣﴾

फिर उसने (लोगों को) एकत्रित किया। फिर पुकारा।

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79:24
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

فَقَالَ أَنَا۠ رَبُّكُمُ ٱلْأَعْلَىٰ﴿٢٤﴾

तो उसने कहा : मैं तुम्हारा सबसे ऊँचा पालनहार हूँ।

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79:25
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

فَأَخَذَهُ ٱللَّهُ نَكَالَ ٱلْـَٔاخِرَةِ وَٱلْأُولَىٰٓ﴿٢٥﴾

तो अल्लाह ने उसे आख़िरत और दुनिया की यातना में पकड़ लिया।

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79:26
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَعِبْرَةً لِّمَن يَخْشَىٰٓ﴿٢٦﴾

निःसंदेह इसमें उस व्यक्ति के लिए शिक्षा है, जो डरता है।

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79:27
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

ءَأَنتُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَمِ ٱلسَّمَآءُ ۚ بَنَىٰهَا﴿٢٧﴾

क्या तुम्हें पैदा करना अधिक कठिन है या आकाश को, जिसे उसने बनाया।1

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79:28
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

رَفَعَ سَمْكَهَا فَسَوَّىٰهَا﴿٢٨﴾

उसकी छत को ऊँचा किया, फिर उसे बराबर किया।

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79:29
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

وَأَغْطَشَ لَيْلَهَا وَأَخْرَجَ ضُحَىٰهَا﴿٢٩﴾

और उसकी रात को अंधेरा कर दिया तथा उसके दिन के प्रकाश को प्रकट कर दिया।

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79:30
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

وَٱلْأَرْضَ بَعْدَ ذَٰلِكَ دَحَىٰهَآ﴿٣٠﴾

और उसके बाद धरती को बिछाया।

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79:31
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

أَخْرَجَ مِنْهَا مَآءَهَا وَمَرْعَىٰهَا﴿٣١﴾

उससे उसका पानी और उसका चारा निकाला।

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79:32
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

وَٱلْجِبَالَ أَرْسَىٰهَا﴿٣٢﴾

और पर्वतों को गाड़ दिया।

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79:33
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

مَتَـٰعًا لَّكُمْ وَلِأَنْعَـٰمِكُمْ﴿٣٣﴾

तुम्हारे तथा तुम्हारे पशुओं के लाभ के लिए।

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79:34
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

فَإِذَا جَآءَتِ ٱلطَّآمَّةُ ٱلْكُبْرَىٰ﴿٣٤﴾

फिर जब बड़ी आपदा (क़ियामत) आ जाएगी।1

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79:35
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

يَوْمَ يَتَذَكَّرُ ٱلْإِنسَـٰنُ مَا سَعَىٰ﴿٣٥﴾

जिस दिन इनसान अपने किए को याद करेगा।1

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79:36
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

وَبُرِّزَتِ ٱلْجَحِيمُ لِمَن يَرَىٰ﴿٣٦﴾

और देखने वाले के लिए जहन्नम सामने कर दी जाएगी।

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79:37
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

فَأَمَّا مَن طَغَىٰ﴿٣٧﴾

तो जो व्यक्ति हद से बढ़ गया।

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79:38
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

وَءَاثَرَ ٱلْحَيَوٰةَ ٱلدُّنْيَا﴿٣٨﴾

और उसने सांसारिक जीवन को वरीयता दी।

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79:39
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

فَإِنَّ ٱلْجَحِيمَ هِىَ ٱلْمَأْوَىٰ﴿٣٩﴾

तो निःसंदेह जहन्नम ही उसका ठिकाना है।

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79:40
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

وَأَمَّا مَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِۦ وَنَهَى ٱلنَّفْسَ عَنِ ٱلْهَوَىٰ﴿٤٠﴾

लेकिन जो अपने पालनहार के समक्ष खड़ा होने से डर गया तथा अपने मन को बुरी इच्छा से रोक लिया।

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79:41
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

فَإِنَّ ٱلْجَنَّةَ هِىَ ٱلْمَأْوَىٰ﴿٤١﴾

तो निःसंदेह जन्नत ही उसका ठिकाना है।

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79:42
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

يَسْـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلسَّاعَةِ أَيَّانَ مُرْسَىٰهَا﴿٤٢﴾

वे आपसे क़ियामत के बारे में पूछते हैं कि वह कब घटित होगी?1

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79:43
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

فِيمَ أَنتَ مِن ذِكْرَىٰهَآ﴿٤٣﴾

आपका उसके उल्लेख करने से क्या संबंध है?

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79:44
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

إِلَىٰ رَبِّكَ مُنتَهَىٰهَآ﴿٤٤﴾

उस (के ज्ञान) की अंतिमता तुम्हारे पालनहार ही की ओर है।

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79:45
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

إِنَّمَآ أَنتَ مُنذِرُ مَن يَخْشَىٰهَا﴿٤٥﴾

आप तो केवल उसे डराने वाले हैं, जो उससे डरता है।1

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79:46
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 584

كَأَنَّهُمْ يَوْمَ يَرَوْنَهَا لَمْ يَلْبَثُوٓا۟ إِلَّا عَشِيَّةً أَوْ ضُحَىٰهَا﴿٤٦﴾

जिस दिन वे उसे देखेंगे, तो (ऐसा लगेगा) मानो वे (दुनिया में) केवल एक शाम या उसकी सुबह ही ठहरे हैं।

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