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मक्की·42 आयतें

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

80:1
पारा 30
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

عَبَسَ وَتَوَلَّىٰٓ﴿١﴾

उस (नबी) ने त्योरी चढ़ाई और मुँह फेर लिया।

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80:2
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

أَن جَآءَهُ ٱلْأَعْمَىٰ﴿٢﴾

इस कारण कि उनके पास अंधा आया।

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80:3
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

وَمَا يُدْرِيكَ لَعَلَّهُۥ يَزَّكَّىٰٓ﴿٣﴾

और आपको क्या मालूम शायद वह पवित्रता प्राप्त कर ले।

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80:4
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

أَوْ يَذَّكَّرُ فَتَنفَعَهُ ٱلذِّكْرَىٰٓ﴿٤﴾

या नसीहत ग्रहण करे, तो वह नसीहत उसे लाभ दे।

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80:5
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

أَمَّا مَنِ ٱسْتَغْنَىٰ﴿٥﴾

लेकिन जो बेपरवाह हो गया।

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80:6
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

فَأَنتَ لَهُۥ تَصَدَّىٰ﴿٦﴾

तो आप उसके पीछे पड़ रहे हैं।

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80:7
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

وَمَا عَلَيْكَ أَلَّا يَزَّكَّىٰ﴿٧﴾

हालाँकि आपपर कोई दोष नहीं कि वह पवित्रता ग्रहण नहीं करता।

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80:8
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

وَأَمَّا مَن جَآءَكَ يَسْعَىٰ﴿٨﴾

लेकिन जो व्यक्ति आपके पास दौड़ता हुआ आया।

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80:9
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

وَهُوَ يَخْشَىٰ﴿٩﴾

और वह डर (भी) रहा है।

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80:10
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

فَأَنتَ عَنْهُ تَلَهَّىٰ﴿١٠﴾

तो आप उसकी ओर ध्यान नहीं देते।1

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80:11
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

كَلَّآ إِنَّهَا تَذْكِرَةٌ﴿١١﴾

ऐसा हरगिज़ नहीं चाहिए, यह (क़ुरआन) तो एक उपदेश है।

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80:12
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

فَمَن شَآءَ ذَكَرَهُۥ﴿١٢﴾

अतः जो चाहे, उसे याद करे।

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80:13
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

فِى صُحُفٍ مُّكَرَّمَةٍ﴿١٣﴾

(यह क़ुरआन) सम्मानित सहीफ़ों (ग्रंथों) में है।

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80:14
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

مَّرْفُوعَةٍ مُّطَهَّرَةٍۭ﴿١٤﴾

जो उच्च स्थान वाले तथा पवित्र हैं।

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80:15
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

بِأَيْدِى سَفَرَةٍ﴿١٥﴾

ऐसे लिखने वालों (फ़रिश्तों) के हाथों में हैं।

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80:16
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

كِرَامٍۭ بَرَرَةٍ﴿١٦﴾

जो माननीय और नेक हैं।1

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80:17
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

قُتِلَ ٱلْإِنسَـٰنُ مَآ أَكْفَرَهُۥ﴿١٧﴾

सर्वनाश हो मनुष्य का, वह कितना कृतघ्न (नाशुक्रा) है।

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80:18
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

مِنْ أَىِّ شَىْءٍ خَلَقَهُۥ﴿١٨﴾

(अल्लाह ने) उसे किस चीज़ से पैदा किया?

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80:19
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

مِن نُّطْفَةٍ خَلَقَهُۥ فَقَدَّرَهُۥ﴿١٩﴾

एक नुत्फ़े (वीर्य) से उसे पैदा किया, फिर विभिन्न चरणों में उसकी रचना की।

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80:20
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

ثُمَّ ٱلسَّبِيلَ يَسَّرَهُۥ﴿٢٠﴾

फिर उसके लिए रास्ता आसान कर दिया।

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80:21
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

ثُمَّ أَمَاتَهُۥ فَأَقْبَرَهُۥ﴿٢١﴾

फिर उसे मृत्यु दी, फिर उसे क़ब्र में रखवाया।

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80:22
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

ثُمَّ إِذَا شَآءَ أَنشَرَهُۥ﴿٢٢﴾

फिर जब वह चाहेगा, उसे उठाएगा।

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80:23
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

كَلَّا لَمَّا يَقْضِ مَآ أَمَرَهُۥ﴿٢٣﴾

हरगिज़ नहीं, अभी तक उसने उसे पूरा नहीं किया, जिसका अल्लाह ने उसे आदेश दिया था।1

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80:24
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

فَلْيَنظُرِ ٱلْإِنسَـٰنُ إِلَىٰ طَعَامِهِۦٓ﴿٢٤﴾

अतः इनसान को चाहिए कि अपने भोजन को देखे।

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80:25
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

أَنَّا صَبَبْنَا ٱلْمَآءَ صَبًّا﴿٢٥﴾

कि हमने ख़ूब पानी बरसाया।

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80:26
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

ثُمَّ شَقَقْنَا ٱلْأَرْضَ شَقًّا﴿٢٦﴾

फिर हमने धरती को विशेष रूप से फाड़ा।

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80:27
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

فَأَنۢبَتْنَا فِيهَا حَبًّا﴿٢٧﴾

फिर हमने उसमें अनाज उगाया।

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80:28
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

وَعِنَبًا وَقَضْبًا﴿٢٨﴾

तथा अंगूर और (मवेशियों का) चारा।

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80:29
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

وَزَيْتُونًا وَنَخْلًا﴿٢٩﴾

तथा ज़ैतून और खजूर के पेड़।

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80:30
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

وَحَدَآئِقَ غُلْبًا﴿٣٠﴾

तथा घने बाग़।

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80:31
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

وَفَـٰكِهَةً وَأَبًّا﴿٣١﴾

तथा फल और चारा।

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80:32
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

مَّتَـٰعًا لَّكُمْ وَلِأَنْعَـٰمِكُمْ﴿٣٢﴾

तुम्हारे लिए तथा तुम्हारे पशुओं के लिए जीवन-सामग्री के रूप में।1

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80:33
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

فَإِذَا جَآءَتِ ٱلصَّآخَّةُ﴿٣٣﴾

तो जब कानों को बहरा कर देने वाली प्रचंड आवाज़ (क़ियामत) आ जाएगी।

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80:34
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

يَوْمَ يَفِرُّ ٱلْمَرْءُ مِنْ أَخِيهِ﴿٣٤﴾

जिस दिन इनसान अपने भाई से भागेगा।

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80:35
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

وَأُمِّهِۦ وَأَبِيهِ﴿٣٥﴾

तथा अपनी माता और अपने पिता (से)।

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80:36
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

وَصَـٰحِبَتِهِۦ وَبَنِيهِ﴿٣٦﴾

तथा अपनी पत्नी और अपने बेटों से।

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80:37
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

لِكُلِّ ٱمْرِئٍ مِّنْهُمْ يَوْمَئِذٍ شَأْنٌ يُغْنِيهِ﴿٣٧﴾

उस दिन उनमें से प्रत्येक व्यक्ति की ऐसी स्थिति होगी, जो उसे (दूसरों से) बेपरवाह कर देगी।

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80:38
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

وُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ مُّسْفِرَةٌ﴿٣٨﴾

उस दिन कुछ चेहरे रौशन होंगे।

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80:39
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

ضَاحِكَةٌ مُّسْتَبْشِرَةٌ﴿٣٩﴾

हँसते हुए, प्रसन्न होंगे।

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80:40
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 585

وَوُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ عَلَيْهَا غَبَرَةٌ﴿٤٠﴾

तथा कुछ चेहरों उस दिन धूल से ग्रस्त होंगे।

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80:41
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 586

تَرْهَقُهَا قَتَرَةٌ﴿٤١﴾

उनपर कालिमा छाई होगी।

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80:42
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 586

أُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْكَفَرَةُ ٱلْفَجَرَةُ﴿٤٢﴾

वही काफ़िर और कुकर्मी लोग हैं।1

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