सामग्री पर जाएं
NurVerse
पवित्र क़ुरआननमाज़ का समयकैलेंडरहदीसदुआएंcommon.blog
Ad
Ad
Ad
Ad
NurVerse

क़ुरआन पढ़ें, नमाज़ के समय ट्रैक करें, दुआ करें और अपनी इस्लामी ज़िंदगी समृद्ध करें।

© 2026 NurVerse. सर्वाधिकार सुरक्षित।

ऐप इंस्टॉल करेंसंपर्कगोपनीयता नीतिउपयोग की शर्तें

Yusuf - 12:62

← Yusuf

Yusuf - आयत 62

12:62
पारा 13 · हिज़्ब 25 · पृष्ठ 242

وَقَالَ لِفِتْيَـٰنِهِ ٱجْعَلُوا۟ بِضَـٰعَتَهُمْ فِى رِحَالِهِمْ لَعَلَّهُمْ يَعْرِفُونَهَآ إِذَا ٱنقَلَبُوٓا۟ إِلَىٰٓ أَهْلِهِمْ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ﴿٦٢﴾

और यूसुफ़ ने अपने सेवकों को आदेश दिया : उनका मूलधन1 उनकी बोरियों में रख दो। ताकि वे उसे पहचान लें, जब वे अपने परिजनों की ओर वापस जाएँ, शायद वे फिर आ जाएँ।

—

आयत शेयर करें

Yusuf - 12:62

وَقَالَ لِفِتْيَـٰنِهِ ٱجْعَلُوا۟ بِضَـٰعَتَهُمْ فِى رِحَالِهِمْ لَعَلَّهُمْ يَعْرِفُونَهَآ إِذَا ٱنقَلَبُوٓا۟ إِلَىٰٓ أَهْلِهِمْ لَعَلَّهُمْ يَرْ...

और यूसुफ़ ने अपने सेवकों को आदेश दिया : उनका मूलधन1 उनकी बोरियों में रख दो। ताकि वे उसे पहचान लें, जब वे अपने परिजनों...

← पिछली आयतअगली आयत →