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Yusuf - 12:65

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Yusuf - आयत 65

12:65
पारा 13 · हिज़्ब 25 · पृष्ठ 243

وَلَمَّا فَتَحُوا۟ مَتَـٰعَهُمْ وَجَدُوا۟ بِضَـٰعَتَهُمْ رُدَّتْ إِلَيْهِمْ ۖ قَالُوا۟ يَـٰٓأَبَانَا مَا نَبْغِى ۖ هَـٰذِهِۦ بِضَـٰعَتُنَا رُدَّتْ إِلَيْنَا ۖ وَنَمِيرُ أَهْلَنَا وَنَحْفَظُ أَخَانَا وَنَزْدَادُ كَيْلَ بَعِيرٍ ۖ ذَٰلِكَ كَيْلٌ يَسِيرٌ﴿٦٥﴾

और जब उन्होंने अपना सामान खोला, तो देखा कि उनका मूलधन उन्हें लौटा दिया गया है। वे बोल उठे : पिता जी! हमें और क्या चाहिए? यह हमारा धन हमें वापस कर दिया गया है। (अब) हम अपने घर वालों के लिए ग़ल्ला लाएँगे और अपने भाई की रक्षा करेंगे और एक ऊँट के बोझभर (ग़ल्ला) अधिक1 लाएँगे। यह माप तो बहुत आसान है।

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Yusuf - 12:65

وَلَمَّا فَتَحُوا۟ مَتَـٰعَهُمْ وَجَدُوا۟ بِضَـٰعَتَهُمْ رُدَّتْ إِلَيْهِمْ ۖ قَالُوا۟ يَـٰٓأَبَانَا مَا نَبْغِى ۖ هَـٰذِهِۦ بِضَـٰعَتُنَا رُدَّتْ ...

और जब उन्होंने अपना सामान खोला, तो देखा कि उनका मूलधन उन्हें लौटा दिया गया है। वे बोल उठे : पिता जी! हमें और क्या चाह...

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