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An-Nahl - 16:103

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An-Nahl - आयत 103

16:103
पारा 14 · हिज़्ब 28 · पृष्ठ 279

وَلَقَدْ نَعْلَمُ أَنَّهُمْ يَقُولُونَ إِنَّمَا يُعَلِّمُهُۥ بَشَرٌ ۗ لِّسَانُ ٱلَّذِى يُلْحِدُونَ إِلَيْهِ أَعْجَمِىٌّ وَهَـٰذَا لِسَانٌ عَرَبِىٌّ مُّبِينٌ﴿١٠٣﴾

तथा निःसंदेह हम जानते हैं कि वे (काफ़िर) कहते हैं : इसे तो एक मानव ही सिखाता1 है। उस व्यक्ति की भाषा जिसकी ओर वे ग़लत निस्बत कर रहे हैं, अजमी (ग़ैर-अरबी)2 है और यह स्पष्ट अरबी भाषा है।

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An-Nahl - 16:103

وَلَقَدْ نَعْلَمُ أَنَّهُمْ يَقُولُونَ إِنَّمَا يُعَلِّمُهُۥ بَشَرٌ ۗ لِّسَانُ ٱلَّذِى يُلْحِدُونَ إِلَيْهِ أَعْجَمِىٌّ وَهَـٰذَا لِسَانٌ عَرَبِىٌّ...

तथा निःसंदेह हम जानते हैं कि वे (काफ़िर) कहते हैं : इसे तो एक मानव ही सिखाता1 है। उस व्यक्ति की भाषा जिसकी ओर वे ग़लत...

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