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Al-Isra - आयत 83

17:83
पारा 15 · हिज़्ब 29 · पृष्ठ 290

وَإِذَآ أَنْعَمْنَا عَلَى ٱلْإِنسَـٰنِ أَعْرَضَ وَنَـَٔا بِجَانِبِهِۦ ۖ وَإِذَا مَسَّهُ ٱلشَّرُّ كَانَ يَـُٔوسًا﴿٨٣﴾

और जब हम इनसान पर उपकार करते हैं, तो वह मुँह फेर लेता है और दूर हो जाता1 है। तथा जब उसे दुःख पहुँचता है, तो निराश हो जाता है।

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Al-Isra - 17:83

وَإِذَآ أَنْعَمْنَا عَلَى ٱلْإِنسَـٰنِ أَعْرَضَ وَنَـَٔا بِجَانِبِهِۦ ۖ وَإِذَا مَسَّهُ ٱلشَّرُّ كَانَ يَـُٔوسًا

और जब हम इनसान पर उपकार करते हैं, तो वह मुँह फेर लेता है और दूर हो जाता1 है। तथा जब उसे दुःख पहुँचता है, तो निराश हो ...

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