सामग्री पर जाएं
NurVerse
पवित्र क़ुरआननमाज़ का समयकैलेंडरहदीसदुआएंcommon.blog
Ad
Ad
Ad
Ad
NurVerse

क़ुरआन पढ़ें, नमाज़ के समय ट्रैक करें, दुआ करें और अपनी इस्लामी ज़िंदगी समृद्ध करें।

© 2026 NurVerse. सर्वाधिकार सुरक्षित।

ऐप इंस्टॉल करेंसंपर्कगोपनीयता नीतिउपयोग की शर्तें

Al-Isra - 17:95

← Al-Isra

Al-Isra - आयत 95

17:95
पारा 15 · हिज़्ब 29 · पृष्ठ 291

قُل لَّوْ كَانَ فِى ٱلْأَرْضِ مَلَـٰٓئِكَةٌ يَمْشُونَ مُطْمَئِنِّينَ لَنَزَّلْنَا عَلَيْهِم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ مَلَكًا رَّسُولًا﴿٩٥﴾

(ऐ नबी!) आप कह दें : यदि धरती में फ़रिश्ते (आबाद) होते, जो निश्चिंत होकर चलते-फिरते, तो हम अवश्य उनपर आकाश से कोई फ़रिश्ता ही रसूल बनाकर उतारते।

—

आयत शेयर करें

Al-Isra - 17:95

قُل لَّوْ كَانَ فِى ٱلْأَرْضِ مَلَـٰٓئِكَةٌ يَمْشُونَ مُطْمَئِنِّينَ لَنَزَّلْنَا عَلَيْهِم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ مَلَكًا رَّسُولًا

(ऐ नबी!) आप कह दें : यदि धरती में फ़रिश्ते (आबाद) होते, जो निश्चिंत होकर चलते-फिरते, तो हम अवश्य उनपर आकाश से कोई फ़र...

← पिछली आयतअगली आयत →