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Ya-Sin - 36:68

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Ya-Sin - आयत 68

36:68
पारा 23 · हिज़्ब 45 · पृष्ठ 444

وَمَن نُّعَمِّرْهُ نُنَكِّسْهُ فِى ٱلْخَلْقِ ۖ أَفَلَا يَعْقِلُونَ﴿٦٨﴾

तथा जिसे हम दीर्घायु प्रदान करते हैं, उसे उसकी संरचना में उल्टा1 फेर देते हैं। तो क्या ये नहीं समझते?

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Ya-Sin - 36:68

وَمَن نُّعَمِّرْهُ نُنَكِّسْهُ فِى ٱلْخَلْقِ ۖ أَفَلَا يَعْقِلُونَ

तथा जिसे हम दीर्घायु प्रदान करते हैं, उसे उसकी संरचना में उल्टा1 फेर देते हैं। तो क्या ये नहीं समझते?

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