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Fussilat - 41:3

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Fussilat - आयत 3

41:3
पारा 24 · हिज़्ब 48 · पृष्ठ 477

كِتَـٰبٌ فُصِّلَتْ ءَايَـٰتُهُۥ قُرْءَانًا عَرَبِيًّا لِّقَوْمٍ يَعْلَمُونَ﴿٣﴾

(यह ऐसी) पुस्तक है, जिसकी आयतें खोलकर बयान की गई हैं। (यह) क़ुरआन अरबी (भाषा में) है, उन लोगों के लिए जो ज्ञान रखते हैं।

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Fussilat - 41:3

كِتَـٰبٌ فُصِّلَتْ ءَايَـٰتُهُۥ قُرْءَانًا عَرَبِيًّا لِّقَوْمٍ يَعْلَمُونَ

(यह ऐसी) पुस्तक है, जिसकी आयतें खोलकर बयान की गई हैं। (यह) क़ुरआन अरबी (भाषा में) है, उन लोगों के लिए जो ज्ञान रखते हैं।

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