وَهُوَ ٱلَّذِى يَقْبَلُ ٱلتَّوْبَةَ عَنْ عِبَادِهِۦ وَيَعْفُوا۟ عَنِ ٱلسَّيِّـَٔاتِ وَيَعْلَمُ مَا تَفْعَلُونَ﴿٢٥﴾
वही है, जो अपने बंदों की तौबा क़बूल करता है और बुराइयों1 को माफ़ करता है और जो कुछ तुम करते हो, उसे जानता है।
—Ash-Shuraa - 42:25
وَهُوَ ٱلَّذِى يَقْبَلُ ٱلتَّوْبَةَ عَنْ عِبَادِهِۦ وَيَعْفُوا۟ عَنِ ٱلسَّيِّـَٔاتِ وَيَعْلَمُ مَا تَفْعَلُونَ
वही है, जो अपने बंदों की तौबा क़बूल करता है और बुराइयों1 को माफ़ करता है और जो कुछ तुम करते हो, उसे जानता है।