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Ash-Shuraa - 42:8

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Ash-Shuraa - आयत 8

42:8
पारा 25 · हिज़्ब 49 · पृष्ठ 483

وَلَوْ شَآءَ ٱللَّهُ لَجَعَلَهُمْ أُمَّةً وَٰحِدَةً وَلَـٰكِن يُدْخِلُ مَن يَشَآءُ فِى رَحْمَتِهِۦ ۚ وَٱلظَّـٰلِمُونَ مَا لَهُم مِّن وَلِىٍّ وَلَا نَصِيرٍ﴿٨﴾

और यदि अल्लाह चाहता, तो अवश्य उन्हें एक समुदाय1 बना देता। परंतु वह जिसे चाहता है अपनी रहमत में दाख़िल करता है और ज़ालिमों का न तो कोई दोस्त है और न कोई मददगार।

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Ash-Shuraa - 42:8

وَلَوْ شَآءَ ٱللَّهُ لَجَعَلَهُمْ أُمَّةً وَٰحِدَةً وَلَـٰكِن يُدْخِلُ مَن يَشَآءُ فِى رَحْمَتِهِۦ ۚ وَٱلظَّـٰلِمُونَ مَا لَهُم مِّن وَلِىٍّ وَلَ...

और यदि अल्लाह चाहता, तो अवश्य उन्हें एक समुदाय1 बना देता। परंतु वह जिसे चाहता है अपनी रहमत में दाख़िल करता है और ज़ाल...

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