सामग्री पर जाएं
NurVerse
पवित्र क़ुरआननमाज़ का समयकैलेंडरहदीसदुआएं
Ad
Ad
Ad
Ad
NurVerse

क़ुरआन पढ़ें, नमाज़ के समय ट्रैक करें, दुआ करें और अपनी इस्लामी ज़िंदगी समृद्ध करें।

© 2026 NurVerse. सर्वाधिकार सुरक्षित।

ऐप इंस्टॉल करेंसंपर्कगोपनीयता नीतिउपयोग की शर्तें
सूरह सूची
मुसहफ़ व्यू
0/49

الطور

At-Tur

Tûr

मक्की·49 आयतें

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

52:1
पारा 27
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 523

وَٱلطُّورِ﴿١﴾

क़सम है तूर1 (पर्वत) की!

—
52:2
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 523

وَكِتَـٰبٍ مَّسْطُورٍ﴿٢﴾

और एक पुस्तक{2] की जो लिखी हुई है! 1

—
52:3
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 523

فِى رَقٍّ مَّنشُورٍ﴿٣﴾

ऐसे पन्ने में जो खुला हुआ है।

—
52:4
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 523

وَٱلْبَيْتِ ٱلْمَعْمُورِ﴿٤﴾

तथा बैतुल-मा'मूर (आबाद घर)1 की!

—
52:5
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 523

وَٱلسَّقْفِ ٱلْمَرْفُوعِ﴿٥﴾

तथा ऊँची उठाई हुई छत (आकाश) की!

—
52:6
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 523

وَٱلْبَحْرِ ٱلْمَسْجُورِ﴿٦﴾

और लबालब भरे हुए समुद्र 1 की!

—
52:7
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 523

إِنَّ عَذَابَ رَبِّكَ لَوَٰقِعٌ﴿٧﴾

कि निश्चय आपके पालनहार की यातना अवश्चय घटित होने वाली है।

—
52:8
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 523

مَّا لَهُۥ مِن دَافِعٍ﴿٨﴾

उसे कोई टालने वाला नहीं।

—
52:9
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 523

يَوْمَ تَمُورُ ٱلسَّمَآءُ مَوْرًا﴿٩﴾

जिस दिन आकाश बुरी तरह डगमगाएगा।

—
52:10
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 523

وَتَسِيرُ ٱلْجِبَالُ سَيْرًا﴿١٠﴾

तथा पर्वत बहुत तेज़ी से चलेंगे।

—
52:11
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 523

فَوَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ﴿١١﴾

तो उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ी तबाही है।

—
52:12
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 523

ٱلَّذِينَ هُمْ فِى خَوْضٍ يَلْعَبُونَ﴿١٢﴾

जो व्यर्थ बातों में पड़े खेल रहे हैं।

—
52:13
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 523

يَوْمَ يُدَعُّونَ إِلَىٰ نَارِ جَهَنَّمَ دَعًّا﴿١٣﴾

जिस दिन उन्हें ज़ोर से धक्का देकर जहन्नम की आग में धकेला जाएगा।

—
52:14
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 523

هَـٰذِهِ ٱلنَّارُ ٱلَّتِى كُنتُم بِهَا تُكَذِّبُونَ﴿١٤﴾

यही है वह आग, जिसे तुम झुठलाते थे।

—
52:15
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 524

أَفَسِحْرٌ هَـٰذَآ أَمْ أَنتُمْ لَا تُبْصِرُونَ﴿١٥﴾

तो क्या यह जादू है, या तुम नहीं देख रहे?

—
52:16
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 524

ٱصْلَوْهَا فَٱصْبِرُوٓا۟ أَوْ لَا تَصْبِرُوا۟ سَوَآءٌ عَلَيْكُمْ ۖ إِنَّمَا تُجْزَوْنَ مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ﴿١٦﴾

इसमें प्रवेश कर जाओ। फिर सब्र करो या सब्र न करो, तुम्हारे लिए बराबर है। तुम्हें केवल उसी का बदला दिया जाएगा, जो तुम किया करते थे।

—
52:17
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 524

إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى جَنَّـٰتٍ وَنَعِيمٍ﴿١٧﴾

निःसंदेह डरने वाले लोग बागों और बड़ी नेमत में हैं।

—
52:18
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 524

فَـٰكِهِينَ بِمَآ ءَاتَىٰهُمْ رَبُّهُمْ وَوَقَىٰهُمْ رَبُّهُمْ عَذَابَ ٱلْجَحِيمِ﴿١٨﴾

उसका आनंद लेने वाले हैं जो उनके रब ने उन्हें दिया और उनके रब ने उन्हें दहकती हुई आग की यातना से बचा लिया।

—
52:19
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 524

كُلُوا۟ وَٱشْرَبُوا۟ هَنِيٓـًٔۢا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ﴿١٩﴾

मज़े से खाओ और पियो, उसके बदले जो तुम किया करते थे।

—
52:20
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 524

مُتَّكِـِٔينَ عَلَىٰ سُرُرٍ مَّصْفُوفَةٍ ۖ وَزَوَّجْنَـٰهُم بِحُورٍ عِينٍ﴿٢٠﴾

पंक्तिबद्ध तख़्तों पर तकिया लगाए हुए होंगे और हमने उनका विवाह गोरे बदन, काली आँखों वाली औरतों से कर दिया, जो बड़ी-बड़ी आँखों वाली हैं।

—
52:21
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 524

وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَٱتَّبَعَتْهُمْ ذُرِّيَّتُهُم بِإِيمَـٰنٍ أَلْحَقْنَا بِهِمْ ذُرِّيَّتَهُمْ وَمَآ أَلَتْنَـٰهُم مِّنْ عَمَلِهِم مِّن شَىْءٍ ۚ كُلُّ ٱمْرِئٍۭ بِمَا كَسَبَ رَهِينٌ﴿٢١﴾

और जो लोग ईमान लाए और उनकी संतान ने ईमान के साथ उनका अनुसरण किया, हम उनकी संतान को उनके साथ मिला देंगे तथा उनके कर्मों में उनसे कुछ भी कम न करेंगे। प्रत्येक व्यक्ति उसके बदले में जो उसने कमाया, गिरवी1 रखा हुआ है।

—
52:22
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 524

وَأَمْدَدْنَـٰهُم بِفَـٰكِهَةٍ وَلَحْمٍ مِّمَّا يَشْتَهُونَ﴿٢٢﴾

तथा हम उन्हें और अधिक फल और मांस देंगे उसमें से जो वे चाहेंगे।

—
52:23
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 524

يَتَنَـٰزَعُونَ فِيهَا كَأْسًا لَّا لَغْوٌ فِيهَا وَلَا تَأْثِيمٌ﴿٢٣﴾

वे उसमें एक-दूसरे से मदिरा का प्याला लेंगे, जिसमें न कोई व्यर्थ बात होगी और न गुनाह में डालना।

—
52:24
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 524

۞ وَيَطُوفُ عَلَيْهِمْ غِلْمَانٌ لَّهُمْ كَأَنَّهُمْ لُؤْلُؤٌ مَّكْنُونٌ﴿٢٤﴾

तथा उनके आस-पास चक्कर लगाते रहेंगे उन्हीं के बच्चे, जैसे वे छुपाए हुए मोती हों।

—
52:25
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 524

وَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَسَآءَلُونَ﴿٢٥﴾

और वे एक-दूसरे की ओर मुतवज्जह होकर आपस में सवाल करेंगे।

—
52:26
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 524

قَالُوٓا۟ إِنَّا كُنَّا قَبْلُ فِىٓ أَهْلِنَا مُشْفِقِينَ﴿٢٦﴾

वे कहेंगे : निःसंदेह हम इससे पहले1 अपने घरवालों में डरने वाले थे।

—
52:27
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 524

فَمَنَّ ٱللَّهُ عَلَيْنَا وَوَقَىٰنَا عَذَابَ ٱلسَّمُومِ﴿٢٧﴾

तो अल्लाह ने हमपर उपकार किया और हमें विषैली लू की यातना से बचा लिया।

—
52:28
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 524

إِنَّا كُنَّا مِن قَبْلُ نَدْعُوهُ ۖ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلْبَرُّ ٱلرَّحِيمُ﴿٢٨﴾

निःसंदेह हम इससे पहले1 ही उसे पुकारा करते थे। निश्चय वही तो अति परोपकारी, अत्यंत दयावान् है।

—
52:29
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 524

فَذَكِّرْ فَمَآ أَنتَ بِنِعْمَتِ رَبِّكَ بِكَاهِنٍ وَلَا مَجْنُونٍ﴿٢٩﴾

अतः आप नसीहत करें। क्योंकि अपने पालनहार के अनुग्रह से आप न तो काहिन हैं और न ही पागल।1

—
52:30
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 524

أَمْ يَقُولُونَ شَاعِرٌ نَّتَرَبَّصُ بِهِۦ رَيْبَ ٱلْمَنُونِ﴿٣٠﴾

या वे कहते है कि यह एक कवि है जिसपर हम ज़माने की घटनाओं का इंतज़ार करते हैं?1

—
52:31
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 524

قُلْ تَرَبَّصُوا۟ فَإِنِّى مَعَكُم مِّنَ ٱلْمُتَرَبِّصِينَ﴿٣١﴾

आप कह दें कि तुम प्रतीक्षा करते रहो, मैं (भी) तुम्हारे साथ प्रतीक्षा करने वालों में से हूँ।

—
52:32
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 525

أَمْ تَأْمُرُهُمْ أَحْلَـٰمُهُم بِهَـٰذَآ ۚ أَمْ هُمْ قَوْمٌ طَاغُونَ﴿٣٢﴾

क्या उन्हें उनकी बुद्धियाँ इस बात का आदेश देती हैं, ये वे स्वयं ही सरकश लोग हैं?

—
52:33
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 525

أَمْ يَقُولُونَ تَقَوَّلَهُۥ ۚ بَل لَّا يُؤْمِنُونَ﴿٣٣﴾

या वे कहते हैं कि उसने इसे स्वयं गढ़ लिया है? बल्कि वे ईमान नहीं लाते।

—
52:34
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 525

فَلْيَأْتُوا۟ بِحَدِيثٍ مِّثْلِهِۦٓ إِن كَانُوا۟ صَـٰدِقِينَ﴿٣٤﴾

तो फिर वे इस (क़ुरआन) के समान एक ही बात बनाकर ले आएँ, यदि वे सच्चे हैं।

—
52:35
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 525

أَمْ خُلِقُوا۟ مِنْ غَيْرِ شَىْءٍ أَمْ هُمُ ٱلْخَـٰلِقُونَ﴿٣٥﴾

या वे बिना किसी चीज़ के1 पैदा हो गए हैं, या वे (स्वयं) पैदा करने वाले हैं?

—
52:36
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 525

أَمْ خَلَقُوا۟ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ ۚ بَل لَّا يُوقِنُونَ﴿٣٦﴾

या उन्होंने आकाशों और धरती को पैदा किया है? बल्कि वे विश्वास ही नहीं करते।

—
52:37
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 525

أَمْ عِندَهُمْ خَزَآئِنُ رَبِّكَ أَمْ هُمُ ٱلْمُصَۣيْطِرُونَ﴿٣٧﴾

या उनके पास आपके पालनहार के ख़ज़ाने हैं, या वही अधिकार चलाने वाले हैं?

—
52:38
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 525

أَمْ لَهُمْ سُلَّمٌ يَسْتَمِعُونَ فِيهِ ۖ فَلْيَأْتِ مُسْتَمِعُهُم بِسُلْطَـٰنٍ مُّبِينٍ﴿٣٨﴾

या उनके पास कोई सीढ़ी है, जिसपर वे अच्छी तरह सुन1 लेते हैं? तो उनके सुनने वाले को चाहिए कि वह कोई स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत करे।

—
52:39
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 525

أَمْ لَهُ ٱلْبَنَـٰتُ وَلَكُمُ ٱلْبَنُونَ﴿٣٩﴾

या उस (अल्लाह) के लिए तो बेटियाँ है और तुम्हारे लिए बेटे?

—
52:40
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 525

أَمْ تَسْـَٔلُهُمْ أَجْرًا فَهُم مِّن مَّغْرَمٍ مُّثْقَلُونَ﴿٤٠﴾

या आप उनसे कोई पारिश्रमिक1 माँगते हैं? तो वे उस तावान के बोझ से दबे जा रहे हैं।

—
52:41
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 525

أَمْ عِندَهُمُ ٱلْغَيْبُ فَهُمْ يَكْتُبُونَ﴿٤١﴾

या उनके पास परोक्ष (का ज्ञान) है? तो वे उसे लिखते1 रहते हैं।

—
52:42
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 525

أَمْ يُرِيدُونَ كَيْدًا ۖ فَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ هُمُ ٱلْمَكِيدُونَ﴿٤٢﴾

या वे कोई चाल चलना चाहते हैं? तो जिन लोगों ने इनकार किया, वही चाल में आने वाले हैं।

—
52:43
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 525

أَمْ لَهُمْ إِلَـٰهٌ غَيْرُ ٱللَّهِ ۚ سُبْحَـٰنَ ٱللَّهِ عَمَّا يُشْرِكُونَ﴿٤٣﴾

या उनका अल्लाह के सिवा कोई पूज्य है? पवित्र है अल्लाह उससे जो वे साझी ठहराते हैं।

—
52:44
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 525

وَإِن يَرَوْا۟ كِسْفًا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ سَاقِطًا يَقُولُوا۟ سَحَابٌ مَّرْكُومٌ﴿٤٤﴾

और यदि वे आकाश से कोई टुकड़ा गिरता हुआ देख लें, तो कह देंगे कि यह परत दर परत बादल है।1

—
52:45
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 525

فَذَرْهُمْ حَتَّىٰ يُلَـٰقُوا۟ يَوْمَهُمُ ٱلَّذِى فِيهِ يُصْعَقُونَ﴿٤٥﴾

अतः आप उन्हें छोड़ दें, यहाँ तक कि वे अपने उस दिन को जा मिलें, जिसमें1 वे बेहोश किए जाएँगे।

—
52:46
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 525

يَوْمَ لَا يُغْنِى عَنْهُمْ كَيْدُهُمْ شَيْـًٔا وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ﴿٤٦﴾

जिस दिन न तो उनकी चाल काम आएगी और न उनकी सहायता की जाएगी।

—
52:47
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 525

وَإِنَّ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ عَذَابًا دُونَ ذَٰلِكَ وَلَـٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ﴿٤٧﴾

तथा निश्चय उन लोगों के लिए जिन्होंने अत्याचार किया, उस (आख़िरत) से पहले भी एक यातना1 है। परंतु उनमें से अक्सर लोग नहीं जानते।

—
52:48
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 525

وَٱصْبِرْ لِحُكْمِ رَبِّكَ فَإِنَّكَ بِأَعْيُنِنَا ۖ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ حِينَ تَقُومُ﴿٤٨﴾

और (ऐ नबी!) आप अपने पालनहार का आदेश आने तक धैर्य रखें। निःसंदेह आप हमारी आँखों के सामने हैं। तथा जब आप उठें, तो अपने रब की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता बयान करें।

—
52:49
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 525

وَمِنَ ٱلَّيْلِ فَسَبِّحْهُ وَإِدْبَـٰرَ ٱلنُّجُومِ﴿٤٩﴾

तथा रात के कुछ भाग में फिर उसकी पवित्रता का वर्णन करें और सितारों के चले जाने के बाद भी।1

—
पिछली आयतAdh-Dhariyatअगली आयतAn-Najm