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मक्की·20 आयतें

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

73:1
पारा 29
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 574

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْمُزَّمِّلُ﴿١﴾

ऐ कपड़े में लिपटने वाले!

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73:2
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 574

قُمِ ٱلَّيْلَ إِلَّا قَلِيلًا﴿٢﴾

रात्रि के समय (नमाज़ में) खड़े रहें, सिवाय उसके थोड़े भाग के।1

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73:3
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 574

نِّصْفَهُۥٓ أَوِ ٱنقُصْ مِنْهُ قَلِيلًا﴿٣﴾

आधी रात (नमाज़ पढ़ें) अथवा उससे थोड़ा-सा कम कर लें।

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73:4
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 574

أَوْ زِدْ عَلَيْهِ وَرَتِّلِ ٱلْقُرْءَانَ تَرْتِيلًا﴿٤﴾

या उससे कुछ अधिक कर लें। और क़ुरआन को ठहर-ठहर कर पढ़ें।

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73:5
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 574

إِنَّا سَنُلْقِى عَلَيْكَ قَوْلًا ثَقِيلًا﴿٥﴾

निश्चय हम आपपर (ऐ नबी!) एक भारी वाणी (क़ुरआन) उतारेंगे।

—
73:6
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 574

إِنَّ نَاشِئَةَ ٱلَّيْلِ هِىَ أَشَدُّ وَطْـًٔا وَأَقْوَمُ قِيلًا﴿٦﴾

निःसंदेह रात की इबादत हृदय में अधिक प्रभावी होती है और बात के लिए अधिक उपयुक्त होती है।

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73:7
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 574

إِنَّ لَكَ فِى ٱلنَّهَارِ سَبْحًا طَوِيلًا﴿٧﴾

निःसंदेह आपके लिए दिन में बहुत-से कार्य हैं।

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73:8
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 574

وَٱذْكُرِ ٱسْمَ رَبِّكَ وَتَبَتَّلْ إِلَيْهِ تَبْتِيلًا﴿٨﴾

और अपने पालनहार के नाम का स्मरण करें और सबसे अलग होकर उसी की ओर ध्यान आकर्षित कर लें।

—
73:9
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 574

رَّبُّ ٱلْمَشْرِقِ وَٱلْمَغْرِبِ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ فَٱتَّخِذْهُ وَكِيلًا﴿٩﴾

वह पूर्व तथा पश्चिम का पालनहार है। उसके सिवा कोई पूज्य नहीं। अतः तुम उसी को अपना कार्यसाधक बना लो।

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73:10
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 574

وَٱصْبِرْ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَٱهْجُرْهُمْ هَجْرًا جَمِيلًا﴿١٠﴾

और जो कुछ वे कह रहे हैं1, उसपर धैर्य से काम लें और उन्हें अच्छे ढंग से छोड़ दें।

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73:11
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 574

وَذَرْنِى وَٱلْمُكَذِّبِينَ أُو۟لِى ٱلنَّعْمَةِ وَمَهِّلْهُمْ قَلِيلًا﴿١١﴾

तथा मुझे और इन झुठलाने वाले संपन्न लोगों को छोड़ दें और उन्हें थोड़ी-सी मोहलत दें।

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73:12
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 574

إِنَّ لَدَيْنَآ أَنكَالًا وَجَحِيمًا﴿١٢﴾

निःसंदेह हमारे पास बेड़ियाँ हैं तथा भड़कती हुई आग।

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73:13
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 574

وَطَعَامًا ذَا غُصَّةٍ وَعَذَابًا أَلِيمًا﴿١٣﴾

और गले में फँस जाने वाला भोजन तथा दर्दनाक यातना है।

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73:14
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 574

يَوْمَ تَرْجُفُ ٱلْأَرْضُ وَٱلْجِبَالُ وَكَانَتِ ٱلْجِبَالُ كَثِيبًا مَّهِيلًا﴿١٤﴾

जिस दिन धरती और पर्वत काँप उठेंगे तथा पर्वत गिराई हुई रेत के ढेर हो जाएँगे।

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73:15
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 574

إِنَّآ أَرْسَلْنَآ إِلَيْكُمْ رَسُولًا شَـٰهِدًا عَلَيْكُمْ كَمَآ أَرْسَلْنَآ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ رَسُولًا﴿١٥﴾

निःसंदेह हमने तुम्हारी ओर एक रसूल1 भेजा, जो तुमपर गवाही देने वाला है, जिस प्रकार हमने फ़िरऔन की ओर एक रसूल भेजा।

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73:16
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 574

فَعَصَىٰ فِرْعَوْنُ ٱلرَّسُولَ فَأَخَذْنَـٰهُ أَخْذًا وَبِيلًا﴿١٦﴾

चुनाँचे फ़िरऔन ने उस रसूल की अवज्ञा की, तो हमने उसकी बड़ी सख़्त पकड़ की।

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73:17
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 574

فَكَيْفَ تَتَّقُونَ إِن كَفَرْتُمْ يَوْمًا يَجْعَلُ ٱلْوِلْدَٰنَ شِيبًا﴿١٧﴾

फिर तुम कैसे बचोगे, यदि तुमने कुफ्र किया, उस दिन से जो बच्चों को बूढ़े कर देगा?

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73:18
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 574

ٱلسَّمَآءُ مُنفَطِرٌۢ بِهِۦ ۚ كَانَ وَعْدُهُۥ مَفْعُولًا﴿١٨﴾

उस दिन आकाश फट जाएगा। उसका वादा पूरा होकर रहेगा।

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73:19
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 574

إِنَّ هَـٰذِهِۦ تَذْكِرَةٌ ۖ فَمَن شَآءَ ٱتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِۦ سَبِيلًا﴿١٩﴾

निश्चय यह एक उपदेश है। अतः जो चाहे अपने पालनहार की ओर रास्ता बना ले।1

—
73:20
पारा 29 · हिज़्ब 58 · पृष्ठ 575

۞ إِنَّ رَبَّكَ يَعْلَمُ أَنَّكَ تَقُومُ أَدْنَىٰ مِن ثُلُثَىِ ٱلَّيْلِ وَنِصْفَهُۥ وَثُلُثَهُۥ وَطَآئِفَةٌ مِّنَ ٱلَّذِينَ مَعَكَ ۚ وَٱللَّهُ يُقَدِّرُ ٱلَّيْلَ وَٱلنَّهَارَ ۚ عَلِمَ أَن لَّن تُحْصُوهُ فَتَابَ عَلَيْكُمْ ۖ فَٱقْرَءُوا۟ مَا تَيَسَّرَ مِنَ ٱلْقُرْءَانِ ۚ عَلِمَ أَن سَيَكُونُ مِنكُم مَّرْضَىٰ ۙ وَءَاخَرُونَ يَضْرِبُونَ فِى ٱلْأَرْضِ يَبْتَغُونَ مِن فَضْلِ ٱللَّهِ ۙ وَءَاخَرُونَ يُقَـٰتِلُونَ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ ۖ فَٱقْرَءُوا۟ مَا تَيَسَّرَ مِنْهُ ۚ وَأَقِيمُوا۟ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتُوا۟ ٱلزَّكَوٰةَ وَأَقْرِضُوا۟ ٱللَّهَ قَرْضًا حَسَنًا ۚ وَمَا تُقَدِّمُوا۟ لِأَنفُسِكُم مِّنْ خَيْرٍ تَجِدُوهُ عِندَ ٱللَّهِ هُوَ خَيْرًا وَأَعْظَمَ أَجْرًا ۚ وَٱسْتَغْفِرُوا۟ ٱللَّهَ ۖ إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌۢ﴿٢٠﴾

निःसंदेह आपका पालनहार जानता है कि आप (तहज्जुद की नमाज़ में) रात के दो-तिहाई भाग से कुछ कम तथा उसका आधा भाग और उसका एक-तिहाई भाग खड़े होते हैं। तथा आपके साथियों का एक समूह भी (ऐसा करता है)। और अल्लाह ही रात तथा दिन का अनुमान रखता है। उसने जान लिया कि तुम हरगिज़ उसकी क्षमता नहीं रखोगे। अतः उसने तुमपर दया की। अतः क़ुरआन में से जो आसान हो, पढ़ो।1 वह जानता है कि निश्चय तुममें से कुछ लोग बीमार होंगे और कुछ अन्य लोग धरती में यात्रा करेंगे, अल्लाह का अनुग्रह तलाश करेंगे और कुछ दूसरे लोग अल्लाह की राह में युद्ध करेंगे। अतः उसमें से जो आसान हो, पढ़ो। तथा नमाज़ क़ायम करो और ज़कात दो और अल्लाह को उत्तम ऋण2 दो। तथा तुम अपने लिए जो भी भलाई आगे भेजोगे, उसे अल्लाह के पास अति उत्तम और बदले की दृष्टि से बढ़कर पाओगे। और अल्लाह से क्षमा याचना करो। निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।

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