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मक्की·19 आयतें

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

82:1
पारा 30
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 587

إِذَا ٱلسَّمَآءُ ٱنفَطَرَتْ﴿١﴾

जब आकाश फट जाएगा।

—
82:2
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 587

وَإِذَا ٱلْكَوَاكِبُ ٱنتَثَرَتْ﴿٢﴾

तथा जब तारे झड़ जाएँगे।

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82:3
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 587

وَإِذَا ٱلْبِحَارُ فُجِّرَتْ﴿٣﴾

और जब समुद्र बह निकलेंगे।

—
82:4
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 587

وَإِذَا ٱلْقُبُورُ بُعْثِرَتْ﴿٤﴾

और जब क़बरें उलट दी जाएँगी।

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82:5
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 587

عَلِمَتْ نَفْسٌ مَّا قَدَّمَتْ وَأَخَّرَتْ﴿٥﴾

तब प्रत्येक प्राणी जान लेगा, जो उसने आगे भेजा और जो पीछे छोड़ा।1

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82:6
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 587

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْإِنسَـٰنُ مَا غَرَّكَ بِرَبِّكَ ٱلْكَرِيمِ﴿٦﴾

ऐ इनसान! तुझे किस चीज़ ने तेरे उदार पालनहार से बहका दिया?

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82:7
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 587

ٱلَّذِى خَلَقَكَ فَسَوَّىٰكَ فَعَدَلَكَ﴿٧﴾

जिसने तेरी रचना की, फिर तुझे ठीक ठाक किया, फिर तुझे संतुलित बनाया।

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82:8
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 587

فِىٓ أَىِّ صُورَةٍ مَّا شَآءَ رَكَّبَكَ﴿٨﴾

जिस रूप में भी उसने चाहा, तुझे बना दिया।1

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82:9
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 587

كَلَّا بَلْ تُكَذِّبُونَ بِٱلدِّينِ﴿٩﴾

हरगिज़ नहीं, बल्कि तुम बदले (के दिन) को झुठलाते हो।

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82:10
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 587

وَإِنَّ عَلَيْكُمْ لَحَـٰفِظِينَ﴿١٠﴾

हालाँकि निःसंदेह तुमपर निगेहबान नियुक्त हैं।

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82:11
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 587

كِرَامًا كَـٰتِبِينَ﴿١١﴾

जो सम्माननीय लिखने वाले हैं।

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82:12
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 587

يَعْلَمُونَ مَا تَفْعَلُونَ﴿١٢﴾

वे जानते हैं, जो तुम करते हो।1

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82:13
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 587

إِنَّ ٱلْأَبْرَارَ لَفِى نَعِيمٍ﴿١٣﴾

निःसंदेह नेक लोग बड़ी नेमत (आनंद) में होंगे।

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82:14
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 587

وَإِنَّ ٱلْفُجَّارَ لَفِى جَحِيمٍ﴿١٤﴾

और निःसंदेह दुराचारी लोग जहन्नम में होंगे।

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82:15
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 587

يَصْلَوْنَهَا يَوْمَ ٱلدِّينِ﴿١٥﴾

वे उसमें बदले के दिन प्रवेश करेंगे।

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82:16
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 587

وَمَا هُمْ عَنْهَا بِغَآئِبِينَ﴿١٦﴾

और वे उससे कभी ग़ायब होने वाले नहीं हैं।1

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82:17
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 587

وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلدِّينِ﴿١٧﴾

और आप क्या जानें कि बदले का दिन क्या है?

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82:18
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 587

ثُمَّ مَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلدِّينِ﴿١٨﴾

फिर आप क्या जानें कि बदले का दिन क्या है?

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82:19
पारा 30 · हिज़्ब 59 · पृष्ठ 587

يَوْمَ لَا تَمْلِكُ نَفْسٌ لِّنَفْسٍ شَيْـًٔا ۖ وَٱلْأَمْرُ يَوْمَئِذٍ لِّلَّهِ﴿١٩﴾

जिस दिन कोई प्राणी किसी प्राणी के लिए किसी चीज़ का अधिकार न रखेगा और उस दिन आदेश केवल अल्लाह का होगा।1

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