۞ إِنَّمَا ٱلصَّدَقَـٰتُ لِلْفُقَرَآءِ وَٱلْمَسَـٰكِينِ وَٱلْعَـٰمِلِينَ عَلَيْهَا وَٱلْمُؤَلَّفَةِ قُلُوبُهُمْ وَفِى ٱلرِّقَابِ وَٱلْغَـٰرِمِينَ وَفِى سَبِيلِ ٱللَّهِ وَٱبْنِ ٱلسَّبِيلِ ۖ فَرِيضَةً مِّنَ ٱللَّهِ ۗ وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ﴿٦٠﴾
ज़कात तो केवल फ़क़ीरों1 और मिस्कीनों के लिए और उसपर नियुक्त कार्यकर्ताओं2 के लिए तथा उनके लिए है जिनके दिलों को परचाना3 अभीष्ट हो, और दास मुक्त करने में और क़र्ज़दारों एवं तावान भरने वालों में और अल्लाह के मार्ग में तथा यात्रियों के लिए है। यह अल्लाह की ओर से एक दायित्व है4 और अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
—At-Tawbah - 9:60
۞ إِنَّمَا ٱلصَّدَقَـٰتُ لِلْفُقَرَآءِ وَٱلْمَسَـٰكِينِ وَٱلْعَـٰمِلِينَ عَلَيْهَا وَٱلْمُؤَلَّفَةِ قُلُوبُهُمْ وَفِى ٱلرِّقَابِ وَٱلْغَـٰرِمِينَ ...
ज़कात तो केवल फ़क़ीरों1 और मिस्कीनों के लिए और उसपर नियुक्त कार्यकर्ताओं2 के लिए तथा उनके लिए है जिनके दिलों को परचान...