आज मैंने तुम्हारा दीन मुकम्मल कर दिया और अपनी नेमत तुम पर पूरी कर दी।
यौम-ए-अरफ़ह ज़िलहिज्जा की 9वीं तारीख़ है, जिस दिन हाजी अरफ़ात में वुक़ूफ़ करते हैं और दीन मुकम्मल हुआ। हज न करने वालों के लिए इस दिन रोज़ा रखना बड़े सवाब का काम है।
आज मैंने तुम्हारा दीन मुकम्मल कर दिया और अपनी नेमत तुम पर पूरी कर दी।
फ़ज्र की क़सम, और दस रातों की, और जुफ़्त-ताक़ की।
यौम-ए-अरफ़ह का रोज़ा पिछले और आने वाले साल के गुनाहों का कफ़्फ़ारा है।
सबसे बेहतरीन दुआ यौम-ए-अरफ़ह की दुआ है।
इस मुबारक दिन पर सुझाई गई इबादतें: