जहाँ ईश्वरीय न्याय होगा और अल्लाह की रहमत से नजात
जहन्नम वह जगह है जहाँ न्याय होगा और हिसाब लिया जाएगा। दुनिया में हमेशा इंसाफ नहीं होता; यह संतुलन आख़िरत में स्थापित होता है। अल्लाह का इंसाफ पूर्ण है।
इस्लामी विद्वानों ने कुरआन और हदीस से जहन्नम के सात स्तर निकाले हैं: जहन्नम, लज़ा, हुतमा, सईर, सकर, जहीम और हाविया। हर स्तर अलग-अलग पापों से जुड़ा है।
'अल्लाह की रहमत उसके गज़ब से आगे है।' (हदीस) कुरआन अल्लाह को पहले रहमान और रहीम के गुणों से परिचय कराता है। काफिरों के लिए जहन्नम का वर्णन होने के बावजूद, ईमान और तौबा के जरिए नजात का दरवाज़ा हमेशा खुला है।
ईमान, सच्ची तौबा, इबादत और अच्छे अख़लाक — ये जहन्नम से बचाने वाले बुनियादी तत्व हैं। नबी ने फ़रमाया: 'आग से बचो, चाहे आधी खजूर के सदक़े से ही क्यों न हो।'
قُلْ يَا عِبَادِيَ الَّذِينَ أَسْرَفُوا عَلَىٰ أَنفُسِهِمْ لَا تَقْنَطُوا مِن رَّحْمَةِ اللَّهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ يَغْفِرُ الذُّنُوبَ جَمِيعًا ۚ إِنَّهُ هُوَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ
Zümer 53
कहो: 'ऐ मेरे बंदो जिन्होंने अपने आप पर ज़्यादती की! अल्लाह की रहमत से नाउम्मीद न हो। बेशक अल्लाह सभी गुनाह माफ़ कर देता है। बेशक वही बहुत माफ़ करने वाला, बड़ा मेहरबान है।'
जहन्नम से बचाव के तरीके
ईमान, सच्ची तौबा, इबादत और अच्छे अख़लाक — ये जहन्नम से बचाने वाले बुनियादी तत्व हैं। नबी ने फ़रमाया: 'आग से बचो, चाहे आधी खजूर के सदक़े से ही क्यों न हो।'
नमाज़ और इबादत
नमाज़, रोज़ा और अन्य इबादतें जहन्नम से बचाव का मूल तरीका हैं।
सच्ची तौबा
अल्लाह की तरफ़ सच्ची तौबा गुनाहों को मिटा देती है। अल्लाह की मग़फ़िरत बेहद है।
अच्छे अख़लाक और सदक़ा
अच्छे अख़लाक और सदक़ा जहन्नम से बचाव के तरीकों में से हैं।
जहन्नम का डर नहीं बल्कि इंसाफ की मांग — यह मानवजाति की सार्वभौमिक सहज प्रवृत्ति है। हर इंसान कहता है 'ज़ुल्म बेसज़ा नहीं जाएगा'। इस्लाम की जहन्नम की समझ इस गहरी इंसाफ की प्रवृत्ति का इलाही जवाब है। और अल्लाह की रहमत हमेशा पहले है।