Mâûn
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
أَرَءَيْتَ ٱلَّذِى يُكَذِّبُ بِٱلدِّينِ﴿١﴾
(ऐ नबी!) क्या आपने उसे देखा, जो बदले के दिन को झुठलाता है?
—فَذَٰلِكَ ٱلَّذِى يَدُعُّ ٱلْيَتِيمَ﴿٢﴾
तो यही है, जो अनाथ (यतीम) को धक्के देता है।
—وَلَا يَحُضُّ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلْمِسْكِينِ﴿٣﴾
तथा ग़रीब को खाना खिलाने के लिए प्रोत्साहित नहीं करता है।1
—فَوَيْلٌ لِّلْمُصَلِّينَ﴿٤﴾
तो विनाश है उन नमाज़ियों के लिए,1
—ٱلَّذِينَ هُمْ عَن صَلَاتِهِمْ سَاهُونَ﴿٥﴾
जो अपनी नमाज़ से लापरवाह हैं।
—ٱلَّذِينَ هُمْ يُرَآءُونَ﴿٦﴾
वे जो दिखावा करते हैं।
—وَيَمْنَعُونَ ٱلْمَاعُونَ﴿٧﴾
तथा साधारण बरतने की चीज़ भी माँगने से नहीं देते।1
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