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106:1क़ुरैश को मानूस कर देने के कारण।
106:2उन्हें जाड़े तथा गर्मी की यात्रा से मानूस कर देने के कारण।1
106:3अतः उन्हें चाहिए कि इस घर (काबा) के मालिक की इबादत करें।1
106:4जिसने उन्हें भूख में खिलाया तथा उन्हें भय से सुरक्षित किया।
107:1(ऐ नबी!) क्या आपने उसे देखा, जो बदले के दिन को झुठलाता है?
107:2तो यही है, जो अनाथ (यतीम) को धक्के देता है।
107:3तथा ग़रीब को खाना खिलाने के लिए प्रोत्साहित नहीं करता है।1
107:4तो विनाश है उन नमाज़ियों के लिए,1
107:5जो अपनी नमाज़ से लापरवाह हैं।
107:6वे जो दिखावा करते हैं।
107:7तथा साधारण बरतने की चीज़ भी माँगने से नहीं देते।1
108:1(ऐ नबी!) हमने आपको कौसर प्रदान किया है।1
108:2तो आप अपने पालनहार ही के लिए नमाज़ पढ़ें तथा क़ुर्बानी करें।1
108:3निःसंदेह आपका शत्रु ही बे नाम व निशान है।1