İnşirâh
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
أَلَمْ نَشْرَحْ لَكَ صَدْرَكَ﴿١﴾
(ऐ नबी!) क्या हमने तुम्हारे लिए तुम्हारा सीना नहीं खोल दिया?
—وَوَضَعْنَا عَنكَ وِزْرَكَ﴿٢﴾
और हमने आपसे आपका बोझ उतार दिया।
—ٱلَّذِىٓ أَنقَضَ ظَهْرَكَ﴿٣﴾
जिसने आपकी कमर तोड़ दी थी।
—وَرَفَعْنَا لَكَ ذِكْرَكَ﴿٤﴾
और हमने आपके लिए आपका ज़िक्र ऊँचा कर दिया।1
—فَإِنَّ مَعَ ٱلْعُسْرِ يُسْرًا﴿٥﴾
निःसंदेह हर कठिनाई के साथ एक आसानी है।
—إِنَّ مَعَ ٱلْعُسْرِ يُسْرًا﴿٦﴾
निःसंदेह (उस) कठिनाई के साथ एक (और) आसानी है।1
—فَإِذَا فَرَغْتَ فَٱنصَبْ﴿٧﴾
अतः, जब आप फ़ारिग़ हो जाएँ, तो परिश्रम करें।
—وَإِلَىٰ رَبِّكَ فَٱرْغَب﴿٨﴾
और अपने पालनहार की ओर अपना ध्यान लगाएँ।1
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