सामग्री पर जाएं
NurVerse
पवित्र क़ुरआननमाज़ का समयकैलेंडरहदीसदुआएंcommon.blog
Ad
Ad
Ad
Ad
NurVerse

क़ुरआन पढ़ें, नमाज़ के समय ट्रैक करें, दुआ करें और अपनी इस्लामी ज़िंदगी समृद्ध करें।

© 2026 NurVerse. सर्वाधिकार सुरक्षित।

ऐप इंस्टॉल करेंसंपर्कगोपनीयता नीतिउपयोग की शर्तें

Ad-Dukhan - 44:35

← Ad-Dukhan

Ad-Dukhan - आयत 35

44:35
पारा 25 · हिज़्ब 50 · पृष्ठ 497

إِنْ هِىَ إِلَّا مَوْتَتُنَا ٱلْأُولَىٰ وَمَا نَحْنُ بِمُنشَرِينَ﴿٣٥﴾

कि हमारी इस पहली मृत्यु के सिवा कोई (मृत्यु) नहीं, और न हम कभी दोबारा उठाए जाएँगे।

—

आयत शेयर करें

Ad-Dukhan - 44:35

إِنْ هِىَ إِلَّا مَوْتَتُنَا ٱلْأُولَىٰ وَمَا نَحْنُ بِمُنشَرِينَ

कि हमारी इस पहली मृत्यु के सिवा कोई (मृत्यु) नहीं, और न हम कभी दोबारा उठाए जाएँगे।

← पिछली आयतअगली आयत →