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Al-Qamar

Kamer

मक्की·55 आयतें

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

54:1
पारा 27
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 528

ٱقْتَرَبَتِ ٱلسَّاعَةُ وَٱنشَقَّ ٱلْقَمَرُ﴿١﴾

क़ियामत बहुत निकट आ गई1 और चाँद फट गया।

—
54:2
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 528

وَإِن يَرَوْا۟ ءَايَةً يُعْرِضُوا۟ وَيَقُولُوا۟ سِحْرٌ مُّسْتَمِرٌّ﴿٢﴾

और यदि वे कोई निशानी देखते हैं, तो मुँह फेर लेते हैं और कहते हैं कि (यह) एक जादू है जो समाप्त हो जाने वाला है।

—
54:3
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 528

وَكَذَّبُوا۟ وَٱتَّبَعُوٓا۟ أَهْوَآءَهُمْ ۚ وَكُلُّ أَمْرٍ مُّسْتَقِرٌّ﴿٣﴾

उन्होंने झुठलाया और अपनी इच्छाओं का पालन किया और प्रत्येक कार्य का एक निश्चित समय है।

—
54:4
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 528

وَلَقَدْ جَآءَهُم مِّنَ ٱلْأَنۢبَآءِ مَا فِيهِ مُزْدَجَرٌ﴿٤﴾

और निःसंदेह उनके पास ऐसी सूचनाएँ आ चुकी हैं, जिनमें डाँटडपट है।

—
54:5
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 528

حِكْمَةٌۢ بَـٰلِغَةٌ ۖ فَمَا تُغْنِ ٱلنُّذُرُ﴿٥﴾

पूर्णतया हिकमत है, फिर भी डरानेवाली चीज़ें काम नहीं आतीं।

—
54:6
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 528

فَتَوَلَّ عَنْهُمْ ۘ يَوْمَ يَدْعُ ٱلدَّاعِ إِلَىٰ شَىْءٍ نُّكُرٍ﴿٦﴾

अतः आप उनसे मुँह फेर लें, जिस दिन पुकारने वाला एक अप्रिय चीज़1 की ओर पुकारेगा।

—
54:7
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 529

خُشَّعًا أَبْصَـٰرُهُمْ يَخْرُجُونَ مِنَ ٱلْأَجْدَاثِ كَأَنَّهُمْ جَرَادٌ مُّنتَشِرٌ﴿٧﴾

उनकी आँखें झुकी होंगी। वे कब्रों से ऐसे निकलेंगे, जैसे वे बिखरी हुई टिड्डियाँ हों।

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54:8
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 529

مُّهْطِعِينَ إِلَى ٱلدَّاعِ ۖ يَقُولُ ٱلْكَـٰفِرُونَ هَـٰذَا يَوْمٌ عَسِرٌ﴿٨﴾

वे बुलाने वाले की ओर तेज़ी से भाग रहे होंगे। काफ़िर कहेंगे : यह बड़ा कठिन दिन है।

—
54:9
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 529

۞ كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ فَكَذَّبُوا۟ عَبْدَنَا وَقَالُوا۟ مَجْنُونٌ وَٱزْدُجِرَ﴿٩﴾

इनसे पहले नूह़ की जाति ने झुठलाया। तो उन्होंने हमारे बंदे को झुठलाया और कहा कि वह पागल है और उसे झिड़क दिया गया।

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54:10
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 529

فَدَعَا رَبَّهُۥٓ أَنِّى مَغْلُوبٌ فَٱنتَصِرْ﴿١٠﴾

तो उसने अपने पालनहार को पुकारा कि निःसंदेह मैं विवश हूँ, अतः तू बदला ले।

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54:11
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 529

فَفَتَحْنَآ أَبْوَٰبَ ٱلسَّمَآءِ بِمَآءٍ مُّنْهَمِرٍ﴿١١﴾

तो हमने ज़ोर से बरसने वाले पानी के साथ आकाश के द्वार खोल दिए।

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54:12
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 529

وَفَجَّرْنَا ٱلْأَرْضَ عُيُونًا فَٱلْتَقَى ٱلْمَآءُ عَلَىٰٓ أَمْرٍ قَدْ قُدِرَ﴿١٢﴾

तथा हमने धरती को स्रोतों के साथ फाड़ दिया, तो सारा जल एक साथ मिल गया, उस कार्य के लिए जो नियत हो चुका था।

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54:13
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 529

وَحَمَلْنَـٰهُ عَلَىٰ ذَاتِ أَلْوَٰحٍ وَدُسُرٍ﴿١٣﴾

और हमने उसे तख़्तों और कीलों वाली (नाव) पर सवार कर दिया।

—
54:14
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 529

تَجْرِى بِأَعْيُنِنَا جَزَآءً لِّمَن كَانَ كُفِرَ﴿١٤﴾

जो हमारी आँखों के सामने चल रही थी, उसका बदला लेने के लिए जिसका इनकार किया गया था।

—
54:15
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 529

وَلَقَد تَّرَكْنَـٰهَآ ءَايَةً فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ﴿١٥﴾

और निःसंदेह हमने उसे एक निशानी बनाकर छोड़ा, तो क्या है कोई उपदेश ग्रहण करने वाला?

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54:16
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 529

فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِى وَنُذُرِ﴿١٦﴾

फिर कैसी थी मेरी यातना तथा मेरा डराना?

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54:17
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 529

وَلَقَدْ يَسَّرْنَا ٱلْقُرْءَانَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ﴿١٧﴾

और निःसंदेह हमने क़ुरआन को उपदेश ग्रहण करने के लिए आसान बना दिया, तो क्या है कोई उपदेश ग्रहण करने वाला?

—
54:18
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 529

كَذَّبَتْ عَادٌ فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِى وَنُذُرِ﴿١٨﴾

आद ने (भी) झुठलाया। तो कैसी थी मेरी यातना तथा मेरा डराना?

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54:19
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 529

إِنَّآ أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ رِيحًا صَرْصَرًا فِى يَوْمِ نَحْسٍ مُّسْتَمِرٍّ﴿١٩﴾

निःसंदहे हमने एक निरंतर अशुभ दिन में उनपर एक तेज़ ठंडी हवा भेज दी।

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54:20
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 529

تَنزِعُ ٱلنَّاسَ كَأَنَّهُمْ أَعْجَازُ نَخْلٍ مُّنقَعِرٍ﴿٢٠﴾

वह लोगों को ऐसे उखाड़ फेंकती थी, जैसे वे उखड़े हुए खजूर के तने हों।

—
54:21
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 529

فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِى وَنُذُرِ﴿٢١﴾

फिर कैसी थी मेरी यातना तथा मेरा डराना?

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54:22
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 529

وَلَقَدْ يَسَّرْنَا ٱلْقُرْءَانَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ﴿٢٢﴾

और निःसंदेह हमने क़ुरआन को उपदेश ग्रहण करने के लिए आसान बना दिया, तो क्या है कोई उपदेश ग्रहण करने वाला?

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54:23
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 529

كَذَّبَتْ ثَمُودُ بِٱلنُّذُرِ﴿٢٣﴾

समूद1 ने डराने वालों को झुठलाया।

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54:24
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 529

فَقَالُوٓا۟ أَبَشَرًا مِّنَّا وَٰحِدًا نَّتَّبِعُهُۥٓ إِنَّآ إِذًا لَّفِى ضَلَـٰلٍ وَسُعُرٍ﴿٢٤﴾

तो उन्होंने कहा : क्या हम अपने ही में से एक आदमी का अनुसरण करें? निश्चय ही हम उस समय बड़ी गुमराही और बावलेपन में होंगे।

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54:25
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 529

أَءُلْقِىَ ٱلذِّكْرُ عَلَيْهِ مِنۢ بَيْنِنَا بَلْ هُوَ كَذَّابٌ أَشِرٌ﴿٢٥﴾

क्या यह उपदेश हमारे बीच में से उसी पर उतारा गया है? बल्कि वह बड़ा झूठा है, अहंकारी है।

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54:26
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 529

سَيَعْلَمُونَ غَدًا مَّنِ ٱلْكَذَّابُ ٱلْأَشِرُ﴿٢٦﴾

शीघ्र ही वे कल जान लेंगे कि बहुत झूठा, अहंकारी कौन है?

—
54:27
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 529

إِنَّا مُرْسِلُوا۟ ٱلنَّاقَةِ فِتْنَةً لَّهُمْ فَٱرْتَقِبْهُمْ وَٱصْطَبِرْ﴿٢٧﴾

निःसंदेह हम यह ऊँटनी उनकी परीक्षा के लिए भेजने वाले हैं। अतः उनकी प्रतीक्षा करो और ख़ूब धैर्य रखो।

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54:28
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 530

وَنَبِّئْهُمْ أَنَّ ٱلْمَآءَ قِسْمَةٌۢ بَيْنَهُمْ ۖ كُلُّ شِرْبٍ مُّحْتَضَرٌ﴿٢٨﴾

और उन्हें सूचित कर दो कि पानी उनके बीच बाँट दिया गया है। पीने की प्रत्येक बारी1 पर उपस्थित हुआ जाएगा।

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54:29
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 530

فَنَادَوْا۟ صَاحِبَهُمْ فَتَعَاطَىٰ فَعَقَرَ﴿٢٩﴾

तो उन्होंने अपने साथी को पुकारा। सो उसने (उसे) पकड़ा और उसका वध कर दिया।

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54:30
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 530

فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِى وَنُذُرِ﴿٣٠﴾

फिर कैसी थी मेरी यातना तथा मेरा डराना?

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54:31
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 530

إِنَّآ أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ صَيْحَةً وَٰحِدَةً فَكَانُوا۟ كَهَشِيمِ ٱلْمُحْتَظِرِ﴿٣١﴾

हमने उनपर एक ही चिंघाड़ भेजी, तो वे बाड़ लगाने वाले की रौंदी हुई बाड़ की तरह हो गए।

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54:32
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 530

وَلَقَدْ يَسَّرْنَا ٱلْقُرْءَانَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ﴿٣٢﴾

और निःसंदेह हमने क़ुरआन को उपदेश ग्रहण करने के लिए आसान बना दिया, तो क्या है कोई उपदेश ग्रहण करने वाला?

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54:33
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 530

كَذَّبَتْ قَوْمُ لُوطٍۭ بِٱلنُّذُرِ﴿٣٣﴾

लूत की जाति ने डराने वालों को झुठला दिया।

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54:34
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 530

إِنَّآ أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ حَاصِبًا إِلَّآ ءَالَ لُوطٍ ۖ نَّجَّيْنَـٰهُم بِسَحَرٍ﴿٣٤﴾

निःसंदेह हमने उनपर पत्थर बरसाने वाली एक हवा भेजी, सिवाय लूत के घरवालों के। उन्हें हमने भोर से कुछ पहले ही बचा लिया।

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54:35
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 530

نِّعْمَةً مِّنْ عِندِنَا ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِى مَن شَكَرَ﴿٣٥﴾

अपनी ओर से (विशेष) अनुग्रह करते हुए। इसी प्रकार हम उसे बदला देते हैं, जो धन्यवाद करे।

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54:36
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 530

وَلَقَدْ أَنذَرَهُم بَطْشَتَنَا فَتَمَارَوْا۟ بِٱلنُّذُرِ﴿٣٦﴾

और निःसंदेह उसने उन्हें हमारी पकड़ से डराया, तो उन्होंने डराने में संदेह किया।

—
54:37
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 530

وَلَقَدْ رَٰوَدُوهُ عَن ضَيْفِهِۦ فَطَمَسْنَآ أَعْيُنَهُمْ فَذُوقُوا۟ عَذَابِى وَنُذُرِ﴿٣٧﴾

और निःसंदेह उन्होंने उसे उसके अतिथियों से बहकाने1 का प्रयास किया, तो हमने उनकी आँखें मेट दीं। अतः मेरी यातना और मेरी चेतावनी का मज़ा चखो।

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54:38
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 530

وَلَقَدْ صَبَّحَهُم بُكْرَةً عَذَابٌ مُّسْتَقِرٌّ﴿٣٨﴾

और निःसंदेह सुबह सवेरे ही उनपर एक न टलने वाली यातना आ पहुँची।

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54:39
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 530

فَذُوقُوا۟ عَذَابِى وَنُذُرِ﴿٣٩﴾

अतः मेरे अज़ाब और मेरे डराने का स्वाद चखो।

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54:40
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 530

وَلَقَدْ يَسَّرْنَا ٱلْقُرْءَانَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ﴿٤٠﴾

और निःसंदेह हमने क़ुरआन को उपदेश ग्रहण करने के लिए आसान बना दिया, तो क्या है कोई उपदेश ग्रहण करने वाला?

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54:41
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 530

وَلَقَدْ جَآءَ ءَالَ فِرْعَوْنَ ٱلنُّذُرُ﴿٤١﴾

तथा निःसंदेह फ़िरऔनियों के पास डराने वाले आए।

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54:42
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 530

كَذَّبُوا۟ بِـَٔايَـٰتِنَا كُلِّهَا فَأَخَذْنَـٰهُمْ أَخْذَ عَزِيزٍ مُّقْتَدِرٍ﴿٤٢﴾

उन्होंने हमारी सब निशानियों को झुठला दिया, तो हमने उन्हें पकड़ लिया, जिस प्रकार सब पर प्रभुत्वशाली, सबसे शक्तिशाली पकड़ता है।

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54:43
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 530

أَكُفَّارُكُمْ خَيْرٌ مِّنْ أُو۟لَـٰٓئِكُمْ أَمْ لَكُم بَرَآءَةٌ فِى ٱلزُّبُرِ﴿٤٣﴾

क्या तुम्हारे काफ़िर उन लोगों से बेहतर हैं, या तुम्हारे लिए (पहली) पुस्कतों में कोई मुक्ति लिखी हुई है?

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54:44
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 530

أَمْ يَقُولُونَ نَحْنُ جَمِيعٌ مُّنتَصِرٌ﴿٤٤﴾

या वे कहते हैं कि हम एक जत्था हैं, जो बदला लेकर रहने वाले हैं?

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54:45
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 530

سَيُهْزَمُ ٱلْجَمْعُ وَيُوَلُّونَ ٱلدُّبُرَ﴿٤٥﴾

शीध्र ही यह समूह पराजित कर दिया जाएगा और ये लोग पीठ दिखाकर भागेंगे।1

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54:46
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 530

بَلِ ٱلسَّاعَةُ مَوْعِدُهُمْ وَٱلسَّاعَةُ أَدْهَىٰ وَأَمَرُّ﴿٤٦﴾

बल्कि क़यामत ही उनके वादे का समय है और क़ियामत कहीं बड़ी विपत्ति और अधिक कड़वी है।

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54:47
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 530

إِنَّ ٱلْمُجْرِمِينَ فِى ضَلَـٰلٍ وَسُعُرٍ﴿٤٧﴾

निश्चय अपराधी लोग बड़ी गुमराही और यातना में हैं।

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54:48
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 530

يَوْمَ يُسْحَبُونَ فِى ٱلنَّارِ عَلَىٰ وُجُوهِهِمْ ذُوقُوا۟ مَسَّ سَقَرَ﴿٤٨﴾

जिस दिन वे आग में अपने चेहरों के बल घसीटे जाएँगे। (कहा जाएगा :) जहन्नम की यातना का मज़ा चखो।

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54:49
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 530

إِنَّا كُلَّ شَىْءٍ خَلَقْنَـٰهُ بِقَدَرٍ﴿٤٩﴾

निःसंदेह हमने प्रत्येक वस्तु को एक अनुमान के साथ पैदा किया है।

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54:50
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 531

وَمَآ أَمْرُنَآ إِلَّا وَٰحِدَةٌ كَلَمْحٍۭ بِٱلْبَصَرِ﴿٥٠﴾

और हमारा आदेश तो केवल एक बार होता है, जैसे आँख की एक झपक।1

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