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मुसहफ़ व्यू
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الرحمن

Ar-Rahman

Rahmân

मदनी·78 आयतें

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

55:1
पारा 27
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 531

ٱلرَّحْمَـٰنُ﴿١﴾

अत्यंत दयावान् ने।

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55:2
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 531

عَلَّمَ ٱلْقُرْءَانَ﴿٢﴾

यह क़ुरआन सिखाया।

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55:3
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 531

خَلَقَ ٱلْإِنسَـٰنَ﴿٣﴾

उसने मनुष्य को पैदा किया।

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55:4
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 531

عَلَّمَهُ ٱلْبَيَانَ﴿٤﴾

उसे बात करना सिखाया।

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55:5
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 531

ٱلشَّمْسُ وَٱلْقَمَرُ بِحُسْبَانٍ﴿٥﴾

सूर्य तथा चंद्रमा एक हिसाब से चल रहे हैं।

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55:6
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 531

وَٱلنَّجْمُ وَٱلشَّجَرُ يَسْجُدَانِ﴿٦﴾

तथा बिना तने के पौधे और पेड़ सजदा करते हैं।

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55:7
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 531

وَٱلسَّمَآءَ رَفَعَهَا وَوَضَعَ ٱلْمِيزَانَ﴿٧﴾

और उसने आकाश को ऊँचा किया और न्याय का संतुलन स्थापित किया।1

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55:8
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 531

أَلَّا تَطْغَوْا۟ فِى ٱلْمِيزَانِ﴿٨﴾

ताकि तुम माप-तौल में अति न करो।

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55:9
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 531

وَأَقِيمُوا۟ ٱلْوَزْنَ بِٱلْقِسْطِ وَلَا تُخْسِرُوا۟ ٱلْمِيزَانَ﴿٩﴾

तथा न्याय के साथ तौल को सीधा रखो और माप-तौल में कमी न करो।

—
55:10
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 531

وَٱلْأَرْضَ وَضَعَهَا لِلْأَنَامِ﴿١٠﴾

और उसने धरती को सृष्टि के लिए (रहने योग्य) बनाया।

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55:11
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 531

فِيهَا فَـٰكِهَةٌ وَٱلنَّخْلُ ذَاتُ ٱلْأَكْمَامِ﴿١١﴾

उसमें फल हैं, तथा आवरणों वाले खजूर के वृक्ष हैं।

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55:12
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 531

وَٱلْحَبُّ ذُو ٱلْعَصْفِ وَٱلرَّيْحَانُ﴿١٢﴾

और भूसे वाले अन्न तथा सुगंधित पौधे हैं।

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55:13
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 531

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ﴿١٣﴾

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

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55:14
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 531

خَلَقَ ٱلْإِنسَـٰنَ مِن صَلْصَـٰلٍ كَٱلْفَخَّارِ﴿١٤﴾

उसने मनुष्य को ठीकरी की तरह बजने वाली मिट्टी से पैदा किया।

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55:15
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 531

وَخَلَقَ ٱلْجَآنَّ مِن مَّارِجٍ مِّن نَّارٍ﴿١٥﴾

तथा जिन्नों को आग की ज्वाला से पैदा किया।

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55:16
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 531

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ﴿١٦﴾

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

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55:17
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 531

رَبُّ ٱلْمَشْرِقَيْنِ وَرَبُّ ٱلْمَغْرِبَيْنِ﴿١٧﴾

(वह) सूर्योदय1 के दोनों स्थानों तथा सूर्यास्त के दोनों स्थानों का रब है।

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55:18
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 531

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ﴿١٨﴾

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

—
55:19
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 532

مَرَجَ ٱلْبَحْرَيْنِ يَلْتَقِيَانِ﴿١٩﴾

उसने दो सागरों को मिला दिया, जो (देखने में) आपस में मिलते हैं।

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55:20
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 532

بَيْنَهُمَا بَرْزَخٌ لَّا يَبْغِيَانِ﴿٢٠﴾

उन दोनों के बीच एक अवरोध है (जिससे) वे आगे नहीं बढ़ते।

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55:21
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 532

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ﴿٢١﴾

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

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55:22
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 532

يَخْرُجُ مِنْهُمَا ٱللُّؤْلُؤُ وَٱلْمَرْجَانُ﴿٢٢﴾

उन दोनों से मोती और मूँगा निकलते हैं।

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55:23
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 532

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ﴿٢٣﴾

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

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55:24
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 532

وَلَهُ ٱلْجَوَارِ ٱلْمُنشَـَٔاتُ فِى ٱلْبَحْرِ كَٱلْأَعْلَـٰمِ﴿٢٤﴾

तथा उसी के अधिकार में हैं समुद्र में चलने वाले पहाड़ों जैसे जहाज़।

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55:25
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 532

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ﴿٢٥﴾

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

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55:26
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 532

كُلُّ مَنْ عَلَيْهَا فَانٍ﴿٢٦﴾

हर कोई जो इस (धरती) पर है, नष्ट होने वाला है।

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55:27
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 532

وَيَبْقَىٰ وَجْهُ رَبِّكَ ذُو ٱلْجَلَـٰلِ وَٱلْإِكْرَامِ﴿٢٧﴾

तथा आपके पालनहार का चेहरा बाक़ी रहेगा, जो बड़ी महिमा और सम्मान वाला है।

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55:28
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 532

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ﴿٢٨﴾

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

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55:29
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 532

يَسْـَٔلُهُۥ مَن فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۚ كُلَّ يَوْمٍ هُوَ فِى شَأْنٍ﴿٢٩﴾

उसी से माँगता है, जो कोई आकाशों तथा धरती में है। वह प्रतिदिन एक (नए) कार्य में है।1

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55:30
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 532

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ﴿٣٠﴾

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

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55:31
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 532

سَنَفْرُغُ لَكُمْ أَيُّهَ ٱلثَّقَلَانِ﴿٣١﴾

हम जल्द ही तुम्हारे लिए फ़ारिग़ होंगे1 ऐ दो भारी समूहो! (जिन्नो और इनसानो!)2

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55:32
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 532

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ﴿٣٢﴾

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

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55:33
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 532

يَـٰمَعْشَرَ ٱلْجِنِّ وَٱلْإِنسِ إِنِ ٱسْتَطَعْتُمْ أَن تَنفُذُوا۟ مِنْ أَقْطَارِ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ فَٱنفُذُوا۟ ۚ لَا تَنفُذُونَ إِلَّا بِسُلْطَـٰنٍ﴿٣٣﴾

ऐ जिन्न तथा मनुष्य के समूह! यदि तुम आकाशों तथा धरती के किनारों से निकल सकते हो, तो निकल भागो, (परंतु) तुम शक्ति (प्रभुत्व) के बिना नहीं निकल सकोगे।1

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55:34
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 532

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ﴿٣٤﴾

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

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55:35
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 532

يُرْسَلُ عَلَيْكُمَا شُوَاظٌ مِّن نَّارٍ وَنُحَاسٌ فَلَا تَنتَصِرَانِ﴿٣٥﴾

तुम दोनों पर आग का ज्वाला तथा धुआँ छोड़ा जाएगा। फिर तुम अपने आपको बचा नहीं सकोगे।

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55:36
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 532

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ﴿٣٦﴾

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

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55:37
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 532

فَإِذَا ٱنشَقَّتِ ٱلسَّمَآءُ فَكَانَتْ وَرْدَةً كَٱلدِّهَانِ﴿٣٧﴾

फिर जब आकाश फट जाएगा, तो वह तेल की तरह लाल हो जाएगा।

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55:38
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 532

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ﴿٣٨﴾

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

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55:39
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 532

فَيَوْمَئِذٍ لَّا يُسْـَٔلُ عَن ذَنۢبِهِۦٓ إِنسٌ وَلَا جَآنٌّ﴿٣٩﴾

फिर उस दिन न किसी मनुष्य से उसके गुनाह के बारे में पूछा जाएगा और न किसी जिन्न से।

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55:40
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 532

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ﴿٤٠﴾

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

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55:41
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 532

يُعْرَفُ ٱلْمُجْرِمُونَ بِسِيمَـٰهُمْ فَيُؤْخَذُ بِٱلنَّوَٰصِى وَٱلْأَقْدَامِ﴿٤١﴾

अपराधियों की पहचान उनके चिह्नों से होगी, फिर माथे के बालों और पैरों से (उन्हें) पकड़ा जाएगा।

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55:42
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 533

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ﴿٤٢﴾

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

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55:43
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 533

هَـٰذِهِۦ جَهَنَّمُ ٱلَّتِى يُكَذِّبُ بِهَا ٱلْمُجْرِمُونَ﴿٤٣﴾

यही है वह जहन्नम, जिसे अपराधी लोग झुठलाते थे।

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55:44
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 533

يَطُوفُونَ بَيْنَهَا وَبَيْنَ حَمِيمٍ ءَانٍ﴿٤٤﴾

वे उसके और खौलते हुए पानी के बीच चक्कर लगा रहे होंगे।

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55:45
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 533

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ﴿٤٥﴾

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

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55:46
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 533

وَلِمَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِۦ جَنَّتَانِ﴿٤٦﴾

और जो व्यक्ति अपने पालनहार के समक्ष खड़े होने से डर गया, उसके लिए दो बाग़ हैं।

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55:47
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 533

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ﴿٤٧﴾

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

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55:48
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 533

ذَوَاتَآ أَفْنَانٍ﴿٤٨﴾

दोनों बहुत शाखाओं वाले हैं।

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55:49
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 533

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ﴿٤٩﴾

तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

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55:50
पारा 27 · हिज़्ब 54 · पृष्ठ 533

فِيهِمَا عَيْنَانِ تَجْرِيَانِ﴿٥٠﴾

उन दोनों में दो जल स्रोत बहते हैं।

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पिछली आयतAl-Qamarअगली आयतAl-Waqi'ah