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Al-'Alaq

Alâk

मक्की·19 आयतें

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

96:1
पारा 30
पारा 30 · हिज़्ब 60 · पृष्ठ 597

ٱقْرَأْ بِٱسْمِ رَبِّكَ ٱلَّذِى خَلَقَ﴿١﴾

अपने पालनहार के नाम से पढ़, जिसने पैदा किया।

—
96:2
पारा 30 · हिज़्ब 60 · पृष्ठ 597

خَلَقَ ٱلْإِنسَـٰنَ مِنْ عَلَقٍ﴿٢﴾

जिसने मनुष्य को रक्त के लोथड़े से पैदा किया।

—
96:3
पारा 30 · हिज़्ब 60 · पृष्ठ 597

ٱقْرَأْ وَرَبُّكَ ٱلْأَكْرَمُ﴿٣﴾

पढ़ और तेरा पालनहार बड़े करम (उदारता) वाला है।

—
96:4
पारा 30 · हिज़्ब 60 · पृष्ठ 597

ٱلَّذِى عَلَّمَ بِٱلْقَلَمِ﴿٤﴾

जिसने क़लम के द्वारा सिखाया।

—
96:5
पारा 30 · हिज़्ब 60 · पृष्ठ 597

عَلَّمَ ٱلْإِنسَـٰنَ مَا لَمْ يَعْلَمْ﴿٥﴾

उसने इनसान को वह सिखाया, जो वह नहीं जानता था।1

—
96:6
पारा 30 · हिज़्ब 60 · पृष्ठ 597

كَلَّآ إِنَّ ٱلْإِنسَـٰنَ لَيَطْغَىٰٓ﴿٦﴾

कदापि नहीं, निःसंदेह मनुष्य सीमा पार कर जाता है।

—
96:7
पारा 30 · हिज़्ब 60 · पृष्ठ 597

أَن رَّءَاهُ ٱسْتَغْنَىٰٓ﴿٧﴾

इसलिए कि वह स्वयं को बेनियाज़ (धनवान्) देखता है।

—
96:8
पारा 30 · हिज़्ब 60 · पृष्ठ 597

إِنَّ إِلَىٰ رَبِّكَ ٱلرُّجْعَىٰٓ﴿٨﴾

निःसंदेह, तेरे पालनहार ही की ओर वापस लौटना है।1

—
96:9
पारा 30 · हिज़्ब 60 · पृष्ठ 597

أَرَءَيْتَ ٱلَّذِى يَنْهَىٰ﴿٩﴾

क्या आपने उस व्यक्ति को देखा, जो रोकता है।

—
96:10
पारा 30 · हिज़्ब 60 · पृष्ठ 597

عَبْدًا إِذَا صَلَّىٰٓ﴿١٠﴾

एक बंदे को, जब वह नमाज़ अदा करता है।

—
96:11
पारा 30 · हिज़्ब 60 · पृष्ठ 597

أَرَءَيْتَ إِن كَانَ عَلَى ٱلْهُدَىٰٓ﴿١١﴾

क्या आपने देखा यदि वह सीधे मार्ग पर हो।

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96:12
पारा 30 · हिज़्ब 60 · पृष्ठ 597

أَوْ أَمَرَ بِٱلتَّقْوَىٰٓ﴿١٢﴾

या अल्लाह से डरने का आदेश देता हो?

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96:13
पारा 30 · हिज़्ब 60 · पृष्ठ 598

أَرَءَيْتَ إِن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰٓ﴿١٣﴾

क्या आपने देखा यदि उसने झुठलाया तथा मुँह फेरा?1

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96:14
पारा 30 · हिज़्ब 60 · पृष्ठ 598

أَلَمْ يَعْلَم بِأَنَّ ٱللَّهَ يَرَىٰ﴿١٤﴾

क्या उसने नहीं जाना कि अल्लाह देख रहा है?

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96:15
पारा 30 · हिज़्ब 60 · पृष्ठ 598

كَلَّا لَئِن لَّمْ يَنتَهِ لَنَسْفَعًۢا بِٱلنَّاصِيَةِ﴿١٥﴾

कदापि नहीं, निश्चय यदि वह नहीं माना, तो हम अवश्य उसे माथे की लट पकड़कर घसीटेंगे।

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96:16
पारा 30 · हिज़्ब 60 · पृष्ठ 598

نَاصِيَةٍ كَـٰذِبَةٍ خَاطِئَةٍ﴿١٦﴾

ऐसे माथे की लट जो झूठा और पापी है।

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96:17
पारा 30 · हिज़्ब 60 · पृष्ठ 598

فَلْيَدْعُ نَادِيَهُۥ﴿١٧﴾

तो वह अपनी सभा को बुला ले।

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96:18
पारा 30 · हिज़्ब 60 · पृष्ठ 598

سَنَدْعُ ٱلزَّبَانِيَةَ﴿١٨﴾

हम भी जहन्नम के फ़रिश्तों को बुला लेंगे।1

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96:19۩
पारा 30 · हिज़्ब 60 · पृष्ठ 598

كَلَّا لَا تُطِعْهُ وَٱسْجُدْ وَٱقْتَرِب ۩﴿١٩﴾

कदापि नहीं, आप उसकी बात न मानें, (बल्कि) सजदा करें और (अल्लाह के) निकट हो जाएँ।1

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