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112:1(ऐ रसूल!) आप कह दीजिए : वह अल्लाह एक है।1
112:2अल्लाह बेनियाज़ है।
112:3न उसकी कोई संतान है और न वह किसी की संतान है।
112:4और न कोई उसका समकक्ष है।1
113:1(ऐ नबी!) कह दीजिए : मैं सुबह के पालनहार की शरण लेता हूँ।
113:2उस चीज़ की बुराई से, जो उसने पैदा की।
113:3तथा अंधेरी रात की बुराई से, जब वह छा जाए।1
113:4तथा गाँठों में फूँकने वालियों की बुराई से।
113:5तथा ईर्ष्या करने वाले की बुराई से, जब वह ईर्ष्या करे।1
114:1(ऐ नबी!) कह दीजिए : मैं शरण लेता हूँ लोगों के पालनहार की।
114:2लोगों के बादशाह की।
114:3लोगों के सत्य पूज्य की।1
114:4वसवसा डालने वाले, पीछे हट जाने वाले की बुराई से।
114:5जो लोगों के दिलों में वसवसे डालता है।
114:6जिन्नों और इनसानों में से।1