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मुसहफ़ व्यू
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الفلق

Al-Falaq

Felâk

मक्की·5 आयतें

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

113:1
पारा 30
पारा 30 · हिज़्ब 60 · पृष्ठ 604

قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلْفَلَقِ﴿١﴾

(ऐ नबी!) कह दीजिए : मैं सुबह के पालनहार की शरण लेता हूँ।

—
113:2
पारा 30 · हिज़्ब 60 · पृष्ठ 604

مِن شَرِّ مَا خَلَقَ﴿٢﴾

उस चीज़ की बुराई से, जो उसने पैदा की।

—
113:3
पारा 30 · हिज़्ब 60 · पृष्ठ 604

وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ﴿٣﴾

तथा अंधेरी रात की बुराई से, जब वह छा जाए।1

—
113:4
पारा 30 · हिज़्ब 60 · पृष्ठ 604

وَمِن شَرِّ ٱلنَّفَّـٰثَـٰتِ فِى ٱلْعُقَدِ﴿٤﴾

तथा गाँठों में फूँकने वालियों की बुराई से।

—
113:5
पारा 30 · हिज़्ब 60 · पृष्ठ 604

وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ﴿٥﴾

तथा ईर्ष्या करने वाले की बुराई से, जब वह ईर्ष्या करे।1

—
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