हमने इसे एक मुबारक रात में नाज़िल किया। बेशक हम ख़बरदार करने वाले हैं।
शब-ए-बराअत शाबान की 15वीं रात है। माना जाता है कि इस रात साल भर के आमाल अल्लाह के सामने पेश किए जाते हैं और रोज़ियाँ व उम्रें तय की जाती हैं।
हमने इसे एक मुबारक रात में नाज़िल किया। बेशक हम ख़बरदार करने वाले हैं।
तुम्हारे रब की तरफ़ से सलामती का पैग़ाम है उस रात।
अल्लाह शाबान की 15वीं रात आसमाने दुनिया पर जलवागर होता है और अपने तमाम बंदों को माफ़ कर देता है।
शाबान की 15वीं रात इबादत में गुज़ारो और दिन में रोज़ा रखो।
इस मुबारक दिन पर सुझाई गई इबादतें: