दुनियावी ज़िंदगी की फ़ानियत और आख़िरत की पायेदारी पर ग़ौर।
शब-ए-रग़ाइब रजब के पहले जुमे की रात है। यह तीन पवित्र महीनों की शुरुआत का पैग़ाम देती है और नमाज़ व इबादत में गुज़ारी जाती है।
दुनियावी ज़िंदगी की फ़ानियत और आख़िरत की पायेदारी पर ग़ौर।
अपने रब की मग़फ़िरत और उस जन्नत की तरफ़ दौड़ो जिसकी चौड़ाई ज़मीन-ओ-आसमान जितनी है।
रजब अल्लाह का महीना है, शाबान मेरा महीना है, और रमज़ान मेरी उम्मत का महीना है।
इस मुबारक दिन पर सुझाई गई इबादतें: