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मक्की·62 आयतें

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

53:1
पारा 27
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 526

وَٱلنَّجْمِ إِذَا هَوَىٰ﴿١﴾

क़सम है तारे की जब वह गिरे!

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53:2
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 526

مَا ضَلَّ صَاحِبُكُمْ وَمَا غَوَىٰ﴿٢﴾

तुम्हारा साथी न तो रास्ते से भटका है और न ही गलत रास्ते पर चला है।

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53:3
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 526

وَمَا يَنطِقُ عَنِ ٱلْهَوَىٰٓ﴿٣﴾

और न वह अपनी इच्छा से बोलता है।

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53:4
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 526

إِنْ هُوَ إِلَّا وَحْىٌ يُوحَىٰ﴿٤﴾

वह तो केवल वह़्य है, जो उतारी जाती है।

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53:5
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 526

عَلَّمَهُۥ شَدِيدُ ٱلْقُوَىٰ﴿٥﴾

उसे बहुत मज़ूबत शक्तियों वाले (फ़रिश्ते)1 ने सिखाया है।

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53:6
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 526

ذُو مِرَّةٍ فَٱسْتَوَىٰ﴿٦﴾

जो बड़ा बलशाली है। फिर वह बुलंद हुआ (अपने असली रूप में प्रकट हुआ)।

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53:7
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 526

وَهُوَ بِٱلْأُفُقِ ٱلْأَعْلَىٰ﴿٧﴾

जबकि वह आकाश के सबसे ऊँचे क्षितिज (पूर्वी किनारे) पर था।

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53:8
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 526

ثُمَّ دَنَا فَتَدَلَّىٰ﴿٨﴾

फिर वह निकट हुआ और उतर आया।

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53:9
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 526

فَكَانَ قَابَ قَوْسَيْنِ أَوْ أَدْنَىٰ﴿٩﴾

फिर वह दो धनुषों की दूरी पर था, या उससे भी निकट।

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53:10
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 526

فَأَوْحَىٰٓ إِلَىٰ عَبْدِهِۦ مَآ أَوْحَىٰ﴿١٠﴾

फिर उसने अल्लाह के बंदे1 की ओर वह़्य की, जो भी वह़्य की।

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53:11
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 526

مَا كَذَبَ ٱلْفُؤَادُ مَا رَأَىٰٓ﴿١١﴾

दिल ने झूठ नहीं बोला, जो कुछ उसने देखा।

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53:12
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 526

أَفَتُمَـٰرُونَهُۥ عَلَىٰ مَا يَرَىٰ﴿١٢﴾

फिर क्या तुम उससे उसपर झगड़ते हो, जो वह देखता है?

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53:13
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 526

وَلَقَدْ رَءَاهُ نَزْلَةً أُخْرَىٰ﴿١٣﴾

हालाँकि, निश्चित रूप से उसने उसे एक और बार उतरते हुए भी देखा है।

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53:14
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 526

عِندَ سِدْرَةِ ٱلْمُنتَهَىٰ﴿١٤﴾

सिदरतुल-मुनतहा'1 के पास।

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53:15
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 526

عِندَهَا جَنَّةُ ٱلْمَأْوَىٰٓ﴿١٥﴾

उसी के पास 'जन्नतुल मावा' (शाश्वत स्वर्ग) है।

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53:16
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 526

إِذْ يَغْشَى ٱلسِّدْرَةَ مَا يَغْشَىٰ﴿١٦﴾

जब सिदरा पर छा रहा था, जो कुछ छा रहा था।1

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53:17
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 526

مَا زَاغَ ٱلْبَصَرُ وَمَا طَغَىٰ﴿١٧﴾

न निगाह इधर-उधर हुई और न सीमा से आगे बढ़ी।

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53:18
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 526

لَقَدْ رَأَىٰ مِنْ ءَايَـٰتِ رَبِّهِ ٱلْكُبْرَىٰٓ﴿١٨﴾

निःसंदेह उसने अपने पालनहार की कुछ बहुत बड़ी निशानियाँ1 देखीं।

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53:19
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 526

أَفَرَءَيْتُمُ ٱللَّـٰتَ وَٱلْعُزَّىٰ﴿١٩﴾

फिर क्या तुमने लात और उज़्ज़ा को देखा।

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53:20
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 526

وَمَنَوٰةَ ٱلثَّالِثَةَ ٱلْأُخْرَىٰٓ﴿٢٠﴾

तथा तीसरी एक और (मूर्ति) मनात को?1

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53:21
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 526

أَلَكُمُ ٱلذَّكَرُ وَلَهُ ٱلْأُنثَىٰ﴿٢١﴾

क्या तुम्हारे लिए पुत्र हैं और उस (अल्लाह) के लिए पुत्रियाँ?

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53:22
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 526

تِلْكَ إِذًا قِسْمَةٌ ضِيزَىٰٓ﴿٢٢﴾

तब तो यह बड़ा अन्यायपूर्ण बँटवारा है।

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53:23
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 526

إِنْ هِىَ إِلَّآ أَسْمَآءٌ سَمَّيْتُمُوهَآ أَنتُمْ وَءَابَآؤُكُم مَّآ أَنزَلَ ٱللَّهُ بِهَا مِن سُلْطَـٰنٍ ۚ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا ٱلظَّنَّ وَمَا تَهْوَى ٱلْأَنفُسُ ۖ وَلَقَدْ جَآءَهُم مِّن رَّبِّهِمُ ٱلْهُدَىٰٓ﴿٢٣﴾

ये (मूर्तियाँ) कुछ नामों के सिवा कुछ भी नहीं हैं, जो तुमने तथा तुम्हारे बाप-दादा ने रख लिए हैं। अल्लाह ने इनका कोई प्रमाण नहीं उतारा है। ये लोग केवल अटकल1 के और उन चीज़ों के पीछे चल रहे हैं जो उनके दिल चाहते हैं। जबकि निःसंदेह उनके पास उनके पालनहार की ओर से मार्गदर्शन आ चुका है।

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53:24
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 526

أَمْ لِلْإِنسَـٰنِ مَا تَمَنَّىٰ﴿٢٤﴾

क्या मनुष्य को वह मिल जाएगा, जिसकी वह कामना करे?

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53:25
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 526

فَلِلَّهِ ٱلْـَٔاخِرَةُ وَٱلْأُولَىٰ﴿٢٥﴾

(नहीं, ऐसा नहीं है) क्योंकि आख़िरत और दुनिया अल्लाह ही के अधिकार में है।

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53:26
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 526

۞ وَكَم مِّن مَّلَكٍ فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ لَا تُغْنِى شَفَـٰعَتُهُمْ شَيْـًٔا إِلَّا مِنۢ بَعْدِ أَن يَأْذَنَ ٱللَّهُ لِمَن يَشَآءُ وَيَرْضَىٰٓ﴿٢٦﴾

और आकाशों में कितने ही फ़रिश्ते हैं कि उनकी सिफ़ारिश कुछ लाभ नहीं देती, परंतु इसके पश्चात कि अल्लाह अनुमति दे जिसके लिए चाहे तथा (जिसे) पसंद करे।1

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53:27
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 527

إِنَّ ٱلَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِٱلْـَٔاخِرَةِ لَيُسَمُّونَ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةَ تَسْمِيَةَ ٱلْأُنثَىٰ﴿٢٧﴾

निःसंदेह वे लोग जो आख़िरत पर ईमान नहीं रखते, निश्चय वे फ़रिश्तों के नाम औरतों के नामों की तरह रखते हैं।

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53:28
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 527

وَمَا لَهُم بِهِۦ مِنْ عِلْمٍ ۖ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا ٱلظَّنَّ ۖ وَإِنَّ ٱلظَّنَّ لَا يُغْنِى مِنَ ٱلْحَقِّ شَيْـًٔا﴿٢٨﴾

हालाँकि उन्हें इसके बारे में कोई ज्ञान नहीं। वे केवल अनुमान के पीछे चल रहे हैं। और निःसंदेह अनुमान सच्चाई की तुलना में किसी काम नहीं आता।

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53:29
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 527

فَأَعْرِضْ عَن مَّن تَوَلَّىٰ عَن ذِكْرِنَا وَلَمْ يُرِدْ إِلَّا ٱلْحَيَوٰةَ ٱلدُّنْيَا﴿٢٩﴾

अतः आप उससे मुँह फेर लें, जिसने हमारी नसीहत से मुँह मोड़ लिया और जिसने दुनिया के जीवन के सिवा कुछ नहीं चाहा।

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53:30
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 527

ذَٰلِكَ مَبْلَغُهُم مِّنَ ٱلْعِلْمِ ۚ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعْلَمُ بِمَن ضَلَّ عَن سَبِيلِهِۦ وَهُوَ أَعْلَمُ بِمَنِ ٱهْتَدَىٰ﴿٣٠﴾

यही उनके ज्ञान की सीमा है। निश्चित रूप से आपका पालनहार ही उसे अधिक जानने वाला है, जो उसके मार्ग से भटक गया और वही उसे भी ज़्यादा जानने वाला है, जो सीधे मार्ग पर चला।

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53:31
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 527

وَلِلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ لِيَجْزِىَ ٱلَّذِينَ أَسَـٰٓـُٔوا۟ بِمَا عَمِلُوا۟ وَيَجْزِىَ ٱلَّذِينَ أَحْسَنُوا۟ بِٱلْحُسْنَى﴿٣١﴾

तथा जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है, सब अल्लाह ही का है, ताकि वह बुराई करने वालों को उनके किए का बदला दे, और भलाई करने वालों को अच्छा बदला दे।

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53:32
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 527

ٱلَّذِينَ يَجْتَنِبُونَ كَبَـٰٓئِرَ ٱلْإِثْمِ وَٱلْفَوَٰحِشَ إِلَّا ٱللَّمَمَ ۚ إِنَّ رَبَّكَ وَٰسِعُ ٱلْمَغْفِرَةِ ۚ هُوَ أَعْلَمُ بِكُمْ إِذْ أَنشَأَكُم مِّنَ ٱلْأَرْضِ وَإِذْ أَنتُمْ أَجِنَّةٌ فِى بُطُونِ أُمَّهَـٰتِكُمْ ۖ فَلَا تُزَكُّوٓا۟ أَنفُسَكُمْ ۖ هُوَ أَعْلَمُ بِمَنِ ٱتَّقَىٰٓ﴿٣٢﴾

वे लोग जो बड़े गुनाहों तथा अश्लील कार्यों1 से दूर रहते हैं, सिवाय कुछ छोटे गुनाहों के। निःसंदेह आपका पालनहार बड़ा क्षमा करने वाला है। वह तुम्हें अधिक जानने वाला है जब उसने तुम्हें धरती2 से पैदा किया और जब तुम अपनी माँओं के पेटों में बच्चे थे। अतः अपनी पवित्रता का दावा मत करो, वह उसे ज़्यादा जानने वाला है जो वास्तव में परहेज़गार है।

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53:33
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 527

أَفَرَءَيْتَ ٱلَّذِى تَوَلَّىٰ﴿٣٣﴾

फिर क्या आपने उसे देखा जिसने मुँह फेर लिया?

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53:34
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 527

وَأَعْطَىٰ قَلِيلًا وَأَكْدَىٰٓ﴿٣٤﴾

और थोड़ा-सा दिया फिर रोक लिया।

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53:35
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 527

أَعِندَهُۥ عِلْمُ ٱلْغَيْبِ فَهُوَ يَرَىٰٓ﴿٣٥﴾

क्या उसके पास परोक्ष का ज्ञान है? अतः वह देख रहा है।1

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53:36
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 527

أَمْ لَمْ يُنَبَّأْ بِمَا فِى صُحُفِ مُوسَىٰ﴿٣٦﴾

या उसे उन बातों की सूचना नहीं दी गई, जो मूसा के ग्रंथों में हैं?

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53:37
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 527

وَإِبْرَٰهِيمَ ٱلَّذِى وَفَّىٰٓ﴿٣٧﴾

और इबराहीम के (ग्रंथों में), जिसने (कर्तव्य) पूरा किया।

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53:38
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 527

أَلَّا تَزِرُ وَازِرَةٌ وِزْرَ أُخْرَىٰ﴿٣٨﴾

कि कोई बोझ उठाने वाला किसी दूसरे का बोझ नहीं उठाएगा।

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53:39
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 527

وَأَن لَّيْسَ لِلْإِنسَـٰنِ إِلَّا مَا سَعَىٰ﴿٣٩﴾

और यह कि मनुष्य के लिए केवल वही है, जिसके लिए उसने प्रयास किया।

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53:40
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 527

وَأَنَّ سَعْيَهُۥ سَوْفَ يُرَىٰ﴿٤٠﴾

और यह कि निश्चय उसका प्रयास शीघ्र ही देखा जाएगा।

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53:41
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 527

ثُمَّ يُجْزَىٰهُ ٱلْجَزَآءَ ٱلْأَوْفَىٰ﴿٤١﴾

फिर उसे उसका पूरा प्रतिफल दिया जाएगा।

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53:42
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 527

وَأَنَّ إِلَىٰ رَبِّكَ ٱلْمُنتَهَىٰ﴿٤٢﴾

और यह कि निःसंदेह आपके पालनहार ही की ओर अंततः पहुँचना है।

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53:43
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 527

وَأَنَّهُۥ هُوَ أَضْحَكَ وَأَبْكَىٰ﴿٤٣﴾

तथा यह कि निःसंदह वही है, जिसने हँसाया तथा रुलाया।

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53:44
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 527

وَأَنَّهُۥ هُوَ أَمَاتَ وَأَحْيَا﴿٤٤﴾

तथा यह कि निःसंदेह वही है, जिसने मृत्यु दी और जीवन दिया।

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53:45
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 528

وَأَنَّهُۥ خَلَقَ ٱلزَّوْجَيْنِ ٱلذَّكَرَ وَٱلْأُنثَىٰ﴿٤٥﴾

और यह कि निःसंदेह उसी ने दो प्रकार : नर और मादा पैदा किए।

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53:46
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 528

مِن نُّطْفَةٍ إِذَا تُمْنَىٰ﴿٤٦﴾

एक बूँद से, जब वह टपकाई जाती है।

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53:47
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 528

وَأَنَّ عَلَيْهِ ٱلنَّشْأَةَ ٱلْأُخْرَىٰ﴿٤٧﴾

और यह कि निःसंदेह उसी के ज़िम्मे दूसरी बार1 पैदा करना है।

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53:48
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 528

وَأَنَّهُۥ هُوَ أَغْنَىٰ وَأَقْنَىٰ﴿٤٨﴾

और यह कि निःसंदेह उसी ने धनी बनाया और कोष प्रदान किया।

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53:49
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 528

وَأَنَّهُۥ هُوَ رَبُّ ٱلشِّعْرَىٰ﴿٤٩﴾

और यह कि निःसंदेह वही ''शे'रा'' 1 का रब है।

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53:50
पारा 27 · हिज़्ब 53 · पृष्ठ 528

وَأَنَّهُۥٓ أَهْلَكَ عَادًا ٱلْأُولَىٰ﴿٥٠﴾

और यह कि निःसंदेह उसी ने प्रथम 'आद' 1 को विनष्ट किया।

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पिछली आयतAt-Turअगली आयतAl-Qamar