Kâfirûn
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
قُلْ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْكَـٰفِرُونَ﴿١﴾
(ऐ नबी!) आप कह दीजिए : ऐ काफ़िरो!
—لَآ أَعْبُدُ مَا تَعْبُدُونَ﴿٢﴾
मैं उसकी इबादत नहीं करता, जिसकी तुम इबादत करते हो।
—وَلَآ أَنتُمْ عَـٰبِدُونَ مَآ أَعْبُدُ﴿٣﴾
और न तुम उसकी इबादत करने वाले हो, जिसकी मैं इबादत करता हूँ।
—وَلَآ أَنَا۠ عَابِدٌ مَّا عَبَدتُّمْ﴿٤﴾
और न मैं उसकी इबादत करने वाला हूँ, जिसकी इबादत तुमने की है।
—وَلَآ أَنتُمْ عَـٰبِدُونَ مَآ أَعْبُدُ﴿٥﴾
और न तुम उसकी इबादत करने वाले हो, जिसकी मैं इबादत करता हूँ।
—لَكُمْ دِينُكُمْ وَلِىَ دِينِ﴿٦﴾
तुम्हारे लिए तुम्हारा धर्म तथा मेरे लिए मेरा धर्म है।1
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