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النصر

An-Nasr

Nasr

मदनी·3 आयतें

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

110:1
पारा 30
पारा 30 · हिज़्ब 60 · पृष्ठ 603

إِذَا جَآءَ نَصْرُ ٱللَّهِ وَٱلْفَتْحُ﴿١﴾

(ऐ नबी!) जब अल्लाह की सहायता एवं विजय आ जाए।

—
110:2
पारा 30 · हिज़्ब 60 · पृष्ठ 603

وَرَأَيْتَ ٱلنَّاسَ يَدْخُلُونَ فِى دِينِ ٱللَّهِ أَفْوَاجًا﴿٢﴾

और आप लोगों को देखें कि वे अल्लाह के धर्म में दल के दल प्रवेश कर रहे हैं।1

—
110:3
पारा 30 · हिज़्ब 60 · पृष्ठ 603

فَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ وَٱسْتَغْفِرْهُ ۚ إِنَّهُۥ كَانَ تَوَّابًۢا﴿٣﴾

तो आप अपने पालनहार की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता का वर्णन करें और उससे क्षमा माँगें, निःसंदेह वह बहुत तौबा क़बूल करने वाला है।1

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